वात प्रकृति वाले के लिए चावल का सेवन वरदान या नुकसान, जानें क्या कहता है आयुर्वेद

New Delhi, 5 अप्रैल . मनुष्य का शरीर प्रवृत्ति पर आधारित होता है और उसी के आधार पर अगर जीवनशैली और आहार को चुना जाए तो आधी बीमारियों का अंत तय है.

हालांकि आज के समय में शरीर की प्रवृत्ति के अनुसार आहार लेना मुश्किल है. यही कारण है कि गलत खान-पान की वजह से शरीर में रुखापन, पाचन अग्नि मंद और मधुमेह से लेकर थायराइड हर घर की समस्या बनती जा रही है, विशेषकर वात प्रवृत्ति वालों के लिए. ऐसे में यह जान लेना ज्यादा जरूरी है कि वात प्रवृत्ति के लोगों को चावल का सेवन करना चाहिए या फिर नहीं.

आयुर्वेद के अनुसार, वात दोष का स्वभाव हल्का, ठंडा और रूखापन देने वाला होता है, जबकि चावल का स्वभाव स्वाद में मीठा, ठंडा और पाचन में आसान होता है. ऐसे में अगर कुछ नियमों के साथ चावल का सेवन किया जाए तो यह वात को शांत करने में मदद करेगा. अब सवाल है कि वात प्रवृत्ति वाले लोगों को चावल का सेवन कैसे करना चाहिए. इसके लिए 1 साल पुराना चावल खाएं, क्योंकि चावल जितना पुराना होता है, उतना ही गुणों से भरपूर होता है.

इसके साथ ही हमेशा गर्म और ताजा चावल ही खाएं. फ्रिज में रखा ठंडा और पुराना चावल वात को बढ़ा सकता है और पाचन की समस्या पैदा कर सकता है. चावल का सेवन हमेशा घी के साथ करें. घी चिकनाई से भरा होता है और वात को शांत कर शरीर के रुखेपन को शांत करने में मदद करता है.

ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि चावल का सेवन हमेशा दोपहर के वक्त लंच में ही करें. इस वक्त पाचन अग्नि तेज होती है और तरह का खाना पचाने में समर्थ होती है. वात प्रवृत्ति वालों को चावल के साथ दही का सेवन करने से बचना चाहिए. इससे शरीर में वात का असंतुलन पैदा होता है. कोशिश करें कि चावल को मूंग की दाल और एक चम्मच घी के साथ खाएं. इससे चावल और शरीर का शुष्कपन कम होगा.

इसके अलावा, वात प्रवृत्ति वालों को रात के समय चावल खाने से परहेज करना चाहिए. रात के समय चावल का सेवन कफ और वात दोनों को असंतुलित कर सकता है.

पीएस/वीसी

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