
इस्लामाबाद, 3 मई . Pakistan तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने पूर्व Prime Minister इमरान खान की हिरासत की निंदा की है, जिसे अब 1,000 दिन पूरे हो चुके हैं. पार्टी ने इसे साफ Political बदले की कार्रवाई बताया और कहा कि इसका कोई संवैधानिक या कानूनी आधार नहीं है. साथ ही इमरान खान की तुरंत रिहाई की मांग की है.
गल्फ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पीटीआई के केंद्रीय सूचना सचिव वकास अकरम ने बयान में कहा कि पीटीआई के संस्थापक इमरान खान को Political बदले का निशाना बनाया जा रहा है. उनके मुताबिक, मौजूदा Government उनकी लोकप्रियता और स्वतंत्र सोच से डरती है, इसलिए उन्हें साइडलाइन करने की कोशिश की जा रही है.
अकरम ने कहा कि इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है. उनका आरोप है कि इमरान खान को एकांत कारावास में रखा गया है और उनके परिवार, वकीलों और पार्टी नेतृत्व को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा, जो कि बुनियादी मानव और कानूनी अधिकारों का साफ उल्लंघन है.
गल्फ टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले इस्लामाबाद हाईकोर्ट में इमरान खान और बुशरा बीबी के 190 मिलियन पाउंड वाले केस में अपील और सजा निलंबन की याचिकाओं पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एकांत कारावास और स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चिंताएं उठाईं, जिसके बाद अदालत ने जल्द सुनवाई का संकेत दिया.
इमरान खान की तरफ से बैरिस्टर सलमान सफदर पेश हुए, जबकि नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) की तरफ से जावेद अशरफ और रफी मकसूद ने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान सलमान सफदर ने बताया कि उन्होंने 8 अप्रैल को पीटीआई संस्थापक से मुलाकात की थी, लेकिन साफ आदेश होने के बावजूद उन्हें बुशरा बीबी से मिलने नहीं दिया गया.
उन्होंने इमरान खान की सेहत से जुड़ी कई बातें भी उठाईं और कहा कि उनकी आंखों की रोशनी 85 प्रतिशत तक कम हो चुकी है और उन्हें एक आंख से भी ठीक से दिखाई नहीं देता.
इससे पहले मार्च में इमरान खान के बेटे कासिम खान ने अपने पिता की हिरासत को ‘मनमाना’ बताया था और Pakistan Government से उनके साथ हो रहे व्यवहार को लेकर गंभीर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों का उल्लंघन है.
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के सत्र के दौरान कासिम खान ने कहा कि इमरान खान का मामला कोई अलग घटना नहीं है, बल्कि 2022 के बाद Pakistan में दमन की एक बड़ी लहर का सबसे बड़ा उदाहरण है. उन्होंने Political कैदियों की गिरफ्तारी, सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमे और पत्रकारों को ‘चुप कराने, अगवा करने या देश छोड़ने पर मजबूर करने’ जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया.
‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, कासिम खान ने यह भी कहा कि इमरान खान को एकांत में रखा गया है. उन्हें परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा और इलाज भी नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने 2024 के फरवरी में हुए आम चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें धांधली के आरोप लगे हैं.
उन्होंने कहा कि Pakistan ने जीएसपी-प्लस ढांचे के तहत कई मानवाधिकार समझौतों का पालन करने का वादा किया है, जिनमें नागरिक और Political अधिकारों का अंतरराष्ट्रीय समझौता और यातना के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन शामिल हैं.
कासिम खान ने कहा, “मैं और मेरा भाई कोई Political लोग नहीं हैं. हम कभी भी ऐसे मंचों पर आना नहीं चाहते थे. लेकिन मेरे पिता की हालत ने हमें मजबूर कर दिया है. हम चुप नहीं रह सकते जब उनकी सेहत बिगड़ रही है और उन्हें हमसे दूर रखा जा रहा है. अगर हालात अलग होते, तो हमें पता है कि वह हमें आजाद कराने के लिए हर संभव कोशिश करते. हम उनके लिए इतना तो कर ही सकते हैं.”
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एवाई/एबीएम