
New Delhi, 10 जुलाई . भारतीय तटरक्षक बल ने भविष्य की समुद्री सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया. इस दौरान समुद्री सुरक्षा के बदलते स्वरूप, दूरदराज समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती परिचालन चुनौतियों, आधुनिक जहाज डिजाइन अवधारणाओं, डिजिटल सत्यापन प्रणालियों और नई तकनीकों के उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई.
विशेषज्ञों ने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि भविष्य के बहुउद्देश्यीय तटरक्षक पोतों को किस प्रकार अधिक सक्षम, लचीला और तकनीकी रूप से उन्नत बनाया जाए, ताकि वे बदलती समुद्री परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें.
New Delhi स्थित तटरक्षक मुख्यालय में ‘एक्सटेंडिंग कैपेबिलिटी फॉर डिस्टेंट होराइजन्स’ विषय पर यह एक दिवसीय सम्मेलन था. इसका उद्घाटन भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने किया. इस सम्मेलन में देश के प्रमुख शिपयार्ड, जहाज डिजाइन संस्थानों तथा भारतीय तटरक्षक बल के नौसैनिक वास्तुकारों और तकनीकी अधिकारियों ने भाग लिया.
सम्मेलन का उद्देश्य भविष्य में भारतीय तटरक्षक बल के लिए बनाए जाने वाले जहाजों और विशेष भूमिका वाले समुद्री प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, मापनीय और आधुनिक तकनीकी मानक विकसित करना था. यह पहल इसलिए की जा रही है ताकि सामान्य गुणात्मक आवश्यकताओं को ठोस क्षमता मानकों में बदला जा सके. सम्मेलन में गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, एल एंड टी शिपबिल्डिंग, टीएआई इंजीनियर्स, सीटेक सॉल्यूशंस, कॉन्सेप्टिया तथा एसईडीएस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
इन संस्थानों ने भारतीय तटरक्षक बल के भविष्य के विशेष भूमिका और बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्मों के लिए प्रस्ताव अनुरोध दस्तावेज तैयार करने संबंधी अपने सुझाव और तकनीकी अनुभव साझा किए. विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सुरक्षा का दायरा लगातार बढ़ रहा है. हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों, समुद्री अपराध, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, खोज एवं बचाव अभियानों तथा आपदा राहत कार्यों को देखते हुए भारतीय तटरक्षक बल को अधिक आधुनिक और बहुउद्देश्यीय पोतों की आवश्यकता होगी. ऐसे में उद्योग और तटरक्षक बल के बीच प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी समन्वय भविष्य की परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा.
सम्मेलन ने भारतीय तटरक्षक बल और घरेलू जहाज निर्माण उद्योग के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया. इसके साथ ही आत्मनिर्भर India के लक्ष्य के अनुरूप स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने तथा अत्याधुनिक तकनीक से लैस भविष्य उन्मुख समुद्री प्लेटफॉर्म विकसित करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई.
भारतीय तटरक्षक बल का मानना है कि स्वदेशी तकनीक, उन्नत डिजाइन और उद्योग के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से ऐसे आधुनिक पोत विकसित किए जा सकेंगे, जो आने वाले वर्षों में देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
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जीसीबी/एबीएम