
अमरावती, 15 अप्रैल . आंध्र प्रदेश के Chief Minister एन चंद्रबाबू नायडू ने अधिकारियों को पोलावरम परियोजना के पूरा होने के बाद गोदावरी जल के प्रभावी उपयोग के लिए विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं.
Wednesday को जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में Chief Minister ने कहा कि दाएं और बाएं मुख्य नहरों के माध्यम से पानी को जलाशयों और तालाबों तक कुशलतापूर्वक पहुंचाया जाए, ताकि सिंचाई समेत अन्य जरूरतें पूरी की जा सकें.
बैठक के दौरान उन्होंने पोलावरम परियोजना, वेलिगोंडा, हंद्री-नीवा सुजला स्रवंती, पोलावरम-नल्लमाला सागर लिंक, चिंतलापुडी लिफ्ट इरिगेशन योजना, वरिकापुडिसेलु और नॉर्थ आंध्र परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की. साथ ही भूजल बढ़ाने के लिए चल रहे जलधारा और जल हराथी कार्यक्रमों का भी आकलन किया.
Chief Minister ने नॉर्थ आंध्र की परियोजनाओं थाराकरामा, महेंद्रतनया, थोटापल्ली बैराज, मद्दुलावलासा, जंजावती और हिरामंडलम लिफ्ट योजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए. उन्होंने नदियों को जोड़ने के कार्य के लिए समयसीमा भी तय की, जिसमें वंशधारा-नागावली लिंक को दिसंबर और नागावली-चंपावती लिंक को जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
उन्होंने बताया कि वंशधारा नदी पर श्रीकाकुलम जिले में प्रस्तावित नेरडी बैराज के लिए बाधाएं दूर हो चुकी हैं और जल्द से जल्द टेंडर जारी करने को कहा गया है.
Chief Minister ने पोलावरम परियोजना को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का भी प्रस्ताव रखा. इसके तहत होटल, शॉपिंग क्षेत्र, सौंदर्यीकरण और पोलावरम से पापिकोंडालु व भद्राचलम तक बोटिंग सुविधाएं विकसित करने की योजना है. साथ ही जल, रॉक, वन और खेल आधारित आकर्षण भी विकसित किए जाएंगे.
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गोदावरी पुष्करम तक इस परियोजना का उद्घाटन सुनिश्चित किया जाए.
Chief Minister ने वेलिगोंडा परियोजना के पहले चरण को जून के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया, जिसकी अनुमानित लागत 2,042 करोड़ रुपये है.
अधिकारियों ने बताया कि मल्याला लिफ्ट के जरिए श्रीशैलम बैकवाटर के 52 टीएमसी पानी को पहले ही रायलसीमा क्षेत्र में पहुंचाया जा चुका है. Chief Minister ने कहा कि राज्य Government के प्रयासों से भूजल उपलब्धता 1 अप्रैल तक 625 टीएमसी पहुंच गई है, जो पिछले साल की तुलना में 12 टीएमसी अधिक है.
उन्होंने बताया कि राज्य में भूजल स्तर में औसतन 0.79 मीटर का सुधार हुआ है और 5,697 गांवों में 8 मीटर की गहराई के भीतर भूजल उपलब्ध है.
बैठक में जल संसाधन मंत्री निम्माला रामानायडू, मुख्य सचिव जी साई प्रसाद और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
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डीएससी