
रांची, 13 अगस्त . Jharkhand के Chief Minister हेमंत सोरेन ने संसद के दोनों सदनों से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए Thursday को President द्रौपदी मुर्मु को पांच पन्नों का पत्र लिखा है. Chief Minister ने विधेयक को केंद्र-राज्य संबंधों के संतुलन और Jharkhand की वित्तीय स्वायत्तता के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए President से मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है. सीएम ने यह पत्र social media पर भी साझा किया है.
सीएम हेमंत सोरेन ने पत्र में कहा कि केंद्र का यह नया कानून लागू हुआ तो Jharkhand को खान-खनिज से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है. इसका असर राज्य की सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और दूसरी जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है. सोरेन ने कहा कि Jharkhand जैसे खनिज संपदा वाले राज्य के लिए यह सिर्फ पैसे का मामला नहीं है. यह सवाल भी है कि राज्य को अपनी खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व पर कितना अधिकार रहेगा और केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का संतुलन कैसे बना रहेगा.
Chief Minister ने विधेयक में प्रस्तावित एमएमडीआर अधिनियम की नई धारा 9डी पर आपत्ति जताई है. उनके मुताबिक, इस प्रावधान के बाद राज्य Governmentें खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर कोई कर, सेस या दूसरी लेवी लगाती हैं तो उस पर केंद्र की तय शर्तें और सीमाएं लागू होंगी.
सोरेन का कहना है कि इसका असर पहले से लगाए गए सेस की बकाया रकम पर भी पड़ सकता है. उन्होंने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय की नौ जजों वाली संविधान पीठ के खनिज संबंधी फैसले का भी जिक्र किया है. Chief Minister के अनुसार, शीर्ष अदालत ने राज्यों को खनिज वाली जमीन पर कर या सेस लगाने का अधिकार माना था. इसी फैसले के बाद Jharkhand विधानसभा ने वर्ष 2024 में मिनरल बेयरिंग लैंड सेस कानून बनाया था.
सोरेन ने पत्र में Jharkhand की अर्थव्यवस्था में खनन से होने वाली आय के आंकडे भी दिए हैं. उन्होंने Jharkhand आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में राज्य के अपने गैर-कर राजस्व का करीब 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से आया. मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपए और 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपए मिले. वर्ष 2026-27 में इससे करीब 13,215 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है. Chief Minister ने आशंका जताई कि नया कानून लागू होने पर राज्य को हर साल हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है. इसका असर उन योजनाओं पर पड़ सकता है, जिनके लिए राज्य Government को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है.
उन्होंने Chief Minister मंईयां सम्मान योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे 50 लाख से ज्यादा महिलाओं को आर्थिक मदद दी जा रही है. इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं भी राज्य की आर्थिक क्षमता पर निर्भर हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सेस की रकम किसी एक योजना के लिए सीधे तय नहीं है, लेकिन इस अतिरिक्त आय से राज्य को अपनी योजनाएं चलाने में मदद मिलती है.
सीएम हेमंत सोरेन ने पत्र में Jharkhand की खनिज संपदा से जुड़े पुराने सवालों को भी उठाया. उन्होंने कहा कि देश के औद्योगिक विकास में Jharkhand ने बड़ा योगदान दिया है, लेकिन खनन की कीमत यहां के लोगों, खासकर आदिवासी समाज को विस्थापन, जमीन के नुकसान, प्रदूषण और पारंपरिक रोजगार के खत्म होने के रूप में चुकानी पड़ी है. ऐसे में खनिज से होने वाली कमाई का उचित हिस्सा खनन प्रभावित इलाकों के विकास पर खर्च होना चाहिए.
Chief Minister ने President को उनके Jharkhand से पुराने जुड़ाव की भी याद दिलाई. उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से 2021 तक Governor रहते हुए President ने आदिवासी और खनन प्रभावित इलाकों को करीब से देखा है और यहां के लोगों की समस्याओं को समझा है. उन्होंने President से विधेयक के असर पर गंभीरता से विचार करने और संविधान के तहत उपलब्ध विकल्पों के आधार पर उचित फैसला लेने का आग्रह किया है.
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एसएनसी/डीकेपी