
शिलांग, 3 जुलाई . मेघालय के Chief Minister कॉनराड के. संगमा ने Friday को जलवायु परिवर्तन को ‘अस्तित्वगत संकट’ बताया और अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए राज्य की तैयारियों को मजबूत करने के लिए तत्काल और समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया. उन्होंने चेतावनी दी कि जून में मेघालय में बारिश में 80 प्रतिशत से अधिक की चिंताजनक कमी दर्ज की गई है.
संगमा यहां ‘अल नीनो की तैयारी के लिए राज्य की प्रतिक्रिया विकसित करना: खाद्य और जल सुरक्षा को मजबूत करना’ विषय पर आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. Chief Minister ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की चिंता नहीं बल्कि एक तात्कालिक वास्तविकता है, जिसके लिए Governmentों, समुदायों और संस्थानों को मिलकर तत्काल कार्य करने की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चुनौती नहीं है; यह हमारी वर्तमान वास्तविकता है. पूर्वानुमान भले ही बदल जाएं, लेकिन तैयारी में देरी नहीं की जा सकती. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य मौसम पूर्वानुमान में सुधार की प्रतीक्षा में कार्रवाई में देरी नहीं कर सकता.
जून माह में दर्ज की गई भारी वर्षा की कमी का जिक्र करते हुए Chief Minister ने कहा कि कृषि, पेयजल उपलब्धता और आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए स्थिति में सक्रिय योजना बनाना आवश्यक है.
उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे शमन उपायों को लागू करते समय लचीला, डेटा-आधारित और अनुकूल दृष्टिकोण अपनाएं, और कहा कि आज उठाया गया हर कदम आने वाली पीढ़ियों की सहनशीलता को निर्धारित करेगा. हम परिपूर्ण योजनाओं का इंतजार नहीं कर सकते. हमें अभी कार्रवाई करनी होगी. आज उठाया गया हर कदम आने वाली पीढ़ियों की सहनशीलता को आकार देगा.
जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलेपन के एक प्रमुख घटक के रूप में सतत कृषि पर प्रकाश डालते हुए संगमा ने कहा कि मेघालय की प्राकृतिक खेती संबंधी पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, जिसमें Prime Minister Narendra Modi की सराहना भी शामिल है.
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने का एक व्यावहारिक मार्ग प्रदान करती है, लेकिन उन्होंने मेघालय की अनूठी भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल कृषि पद्धतियों में नवाचार और विकास की आवश्यकता पर बल दिया.
Chief Minister ने दीर्घकालिक जल सुरक्षा को बढ़ाने के लिए जल संरक्षण, जल स्रोतों का पुनरुद्धार, बांधों और जलाशयों का निर्माण तथा अन्य जल-संरक्षण संरचनाओं जैसे एकीकृत उपायों की आवश्यकता पर भी बल दिया.
समुदाय की अधिक भागीदारी का आह्वान करते हुए संगमा ने निर्वाचित प्रतिनिधियों, पारंपरिक संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों, वैज्ञानिकों, छात्रों और युवा संगठनों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया.
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एमएस/