तमिलनाडु: कोयंबटूर में सीआईएसएफ ने की एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज, परखी गई कुशलता

कोयंबटूर (तमिलनाडु), 23 जून . अगर किसी विमान का अपहरण हो जाता है, तो ऐसी स्थिति में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) उस स्थिति से कैसे निपटेगी? विमान मौजूद यात्रियों को कैसे बचाएगी? इन्हीं सब स्थिति से निपटने के लिए तमिलनाडु के कोयंबटूर में सीआईएसएफ की ओर से एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज़ आयोजित की गई.

इस एक्सरसाइज का मुख्य मकसद यह पता लगाना था कि सीआईएसएफ मौजूदा समय में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कितनी कुशल है. इस मॉक ड्रिल में मख्य रूप से सीआईएसएफ, एयरपोर्ट ऑपरेटर, जिला प्रशासन, स्थानीय Police, बीडीडीएस, फायर सर्विस और एयरलाइन प्रतिनिधियों के कुल 189 कर्मियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया.

मॉक ड्रिल के दौरान यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत ही होगी. इसे दूसरे शब्दों में समझने की कोशिश करें, तो मॉक ड्रिल से पहले ही पूरी रूपरेखा निर्धारित कर ली गई थी. उस रूपरेखा के तहत यह सबकुछ तय न कर लिया गया था कि कैसे क्या करना है?

इस मॉक ड्रिल के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि सभी एजेंसियों के बीच में तालमेल के साथ काम हो. आमतौर पर देखा जाता है कि इस तरह की परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार की एजेंसियों के बीच में तालमेल का अभाव देखा जाता है. इसी वजह से परिस्थितियां ज्यादा विकट हो जाती है. लिहाजा, निकट भविष्य में अगर इस तरह की स्थिति पैदा होती, तो सभी एजेंसियां कैसे सूझबूझ के साथ काम कर सकती हैं? कैसे स्थिति को सामान्य बना सकती है? इस बात का विशेष ध्यान इस मॉक ड्रिल के दौरान रखा गया था, जिसे काफी अहम माना जा रहा है.

मौजूदा समय में एविएशन के क्षेत्र में कई तरह की चुनौतियां प्रकाश में आ रही हैं, जिसे देखते हुए इस तरह के मॉक ड्रिल जरूरी हो जाते हैं. इससे जहां सुरक्षाकर्मी और उससे जुड़े एजेंसियों के लोगों की कुशलता को परखा जाता है, तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी कुशलता को बढ़ाने का भी मौका मिलता है.

बता दें कि इससे पहले भी सीआईएसएफ की ओर से कई बार इस तरह के मॉक ड्रिल किए जा चुके हैं. आमतौर पर इस तरह के मॉक ड्रिल आपदाग्रस्त क्षेत्र से निपटने के लिए किए जाते हैं. लेकिन, इस बार का मॉक ड्रिल मुख्य रूप से एविएशन क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए रहा.

एसएचके/पीएम

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