
कोलकाता, 1 मई . पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने Friday को एक बयान जारी कर तृणमूल कांग्रेस के महासचिव व Lok Sabha सांसद अभिषेक बनर्जी के उस social media बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण के दौरान हावड़ा जिले के उदय नारायणपुर स्थित एक मतदान केंद्र पर केंद्रीय बलों के जवानों द्वारा कथित तौर पर धक्का-मुक्की के बाद एक बुजुर्ग मतदाता की मौत हो गई थी.
सीईओ की ओर से जारी किए गए इस बयान में इन आरोपों को डर फैलाने की कोशिश भी बताया है. सीईओ के बयान के अनुसार, उक्त मतदाता पूर्णचंद्र दोलुई (82) अपने बेटे के साथ उदय नारायणपुर स्थित बूथ संख्या 245 पर वोट डालने गए थे.
सीईओ ने कहा, “अपनी शारीरिक कमजोरी के बावजूद इस बुजुर्ग नागरिक ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल किया. उनके बेटे को बूथ के अंदर ईवीएम तक उनकी मदद करने के लिए जाने की अनुमति दी गई थी. वोट डालने के बाद, डोलुई उम्र से जुड़ी बीमारी (दिल की कमजोरी) के कारण वोटिंग कक्ष के पास अचानक गिर पड़े. उन्हें तुरंत अमता अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.”
अपने बयान में सीईओ ने कहा कि इस पूरी घटना को भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा उदय नारायणपुर के लिए नियुक्त सामान्य पर्यवेक्षक ने रिकॉर्ड किया था. इससे यह साफ होता है कि डोलुई वोट डालने के बाद ही गिरे और उस समय उनके साथ उनका बेटा भी मौजूद था. सीईओ ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि केंद्रीय बलों द्वारा कोई ज़बरदस्ती या धक्का-मुक्की नहीं की गई.
सीइओ ने अपने बयान में कहा, “जहां एक ओर सीएपीएफ के बहादुर जवान पूरी पेशेवरता और साहस के साथ अपनी कठिन ड्यूटी निभा रहे हैं और पूरे बंगाल में मेहनत करके हर नागरिक के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित कर रहे हैं. वहीं वे हमारे गहरे सम्मान और आभार के हकदार हैं, न कि बिना आधार वाले झूठ या Political रूप से प्रेरित आरोपों के.”
उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उस बुजुर्ग नागरिक की मौत का, जिसने एक नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभाया था, Political लाभ के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है.
सीईओ ने अपने बयान में कहा, “लोकतंत्र तथ्यों पर चलता है, डर फैलाने पर नहीं. सच की जीत हो.”
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एसएचके/पीएम