
रायपुर, 23 अप्रैल . छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय Government ने Governmentी कर्मचारियों को Political गतिविधियों से दूर रखने संबंधी अपना आदेश महज 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया. इस फैसले ने राज्य में सियासी हलचल तेज कर दी है.
Wednesday देर रात जारी निर्देश में कहा गया था कि कोई भी Governmentी अधिकारी या कर्मचारी किसी Political दल में पद नहीं रखेगा और न ही Political गतिविधियों में हिस्सा लेगा. उल्लंघन करने पर सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी.
हालांकि, इस आदेश का तुरंत विरोध शुरू हो गया. कांग्रेस पार्टी ने इसके समय और मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे नियम पहले से ही पूरे देश में लागू हैं, फिर नया सर्कुलर जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी.
कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों के कार्यक्रमों में भाग लेना भी इन नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. इस सवाल ने विवाद को और बढ़ा दिया और Government पर स्पष्टीकरण का दबाव बढ़ा.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत Governmentी कर्मचारियों को अपने कार्यों में निष्पक्षता और ईमानदारी बनाए रखना अनिवार्य है. इन नियमों में कर्मचारियों को Political दलों की सक्रिय सदस्यता लेने और Political गतिविधियों में शामिल होने से स्पष्ट रूप से रोका गया है.
Government का कहना है कि वापस लिया गया सर्कुलर इन्हीं प्रावधानों की पुनरावृत्ति मात्र था, लेकिन विपक्ष ने इसे Political दृष्टि से प्रेरित कदम बताया.
आदेश वापस लेकर साय Government ने फिलहाल विवाद को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने Governmentी कर्मचारियों की Political भूमिका और प्रशासनिक निष्पक्षता की सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
विपक्षी दल अब भी इस बात पर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं कि किन गतिविधियों को Political माना जाएगा, खासकर कुछ संगठनों से जुड़े कार्यक्रमों के संदर्भ में.
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डीएससी