
New Delhi, 26 मई . दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र Government द्वारा क्लब खाली कराने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर Tuesday को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. केंद्र Government की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून के हिसाब से कब्जा लिया जाएगा.
जिमखाना क्लब के पदाधिकारियों ने Government के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. Tuesday को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जिमखाना सदस्यों की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की शुरुआत की. वहीं, केंद्र Government की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि क्लॉज़ 4 में एक सिस्टम दिया गया है, जिसके तहत हम लीज तय कर सकते हैं. इसमें उठाए जाने वाले अलग-अलग कदमों के बारे में बताया गया है.
तुषार मेहता ने कहा कि अधिग्रहण के तहत प्रावधान इस नियम में दिए गए हैं. उनमें से एक मुआवज़ा देना है. मुआवज़ा पैसे के तौर पर हो सकता है या Government जमीन का दूसरा टुकड़ा दे सकती है. हम कानून के तहत तय प्रक्रिया के हिसाब से काम करेंगे. हम बस जाकर इसे खाली नहीं कराएंगे. इस पर कोर्ट ने मेहता से पूछा कि क्या हम आपका स्टेटमेंट रिकॉर्ड कर सकते हैं? सिंघवी ने कहा कि यह एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी है.
कोर्ट ने पूछा कि आपकी शिकायत क्या है और आपके मेंबर का कोई विवाद नहीं है? सिंघवी ने कहा कि Government ने आदेश दिया है कि 5 जून को अपनी मर्ज़ी से जिमखाना क्लब को हैंडओवर किया जाए जबकि यह मामला पहले से राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के सामने है.
याचिकाकर्ता की ओर से सिंघवी ने आरोप लगाया कि ये कोई आसान रास्ता नहीं है. वे राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) गए, जिसने 15 सदस्यों वाली पिछली कमेटी को बदल दिया. क्लब कमेटी को Government ने 15 नॉमिनेटेड सदस्यों से बदल दिया है. इस पर तुषार मेहता ने कहा कि सिंघवी को डर है कि कमेटी मिलीभगत कर रही है और हम कानून में तय प्रक्रिया के तहत कब्जा नहीं लेंगे.
केंद्र की तरफ से मेहता ने कहा कि अगर क्लब 5 तारीख को अपनी मर्ज़ी से खाली नहीं भी करता है, तो भी कब्जा नहीं लिया जाएगा, जब तक कि बेदखली के लिए कानून के तहत प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता. कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि जो क्लब सदस्य हैं, अगर जमीन ले भी ली जाती है तो भी मेंबरशिप बनी रहेगी. तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें दूसरी जमीन भी ऑफर की जाएगी.
कोर्ट ने तुषार मेहता से फिर पूछा कि क्या आप यह कहने को तैयार हैं कि आज का मुद्दा सिर्फ खाली कराने को लेकर है? इस पर मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र Government की बनाई जिमखाना मैनेजिंग कमेटी ने हमें पहले ही इस ऑर्डर का विरोध करते हुए लिखा है. Police फोर्स से कोई निकालने की कार्रवाई नहीं की जा सकती. यह सिर्फ कानून के तहत तय प्रक्रिया के हिसाब से ही हो सकता है.
हाईकोर्ट ने कहा कि पहले भी इस मामले में मुकदमेबाजी का इतिहास रहा है. लीज की शर्तों के उल्लंघन को लेकर कार्यवाही शुरू की गई थी, लेकिन बाद में मामला सुलझा लिया गया था. इसके बाद यह कहते हुए एनसीएलटी का रुख किया गया कि गवर्निंग बॉडी द्वारा क्लब का गलत तरीके से प्रबंधन किया जा रहा है. एन ने यह मांग स्वीकार करते हुए 15 सदस्यों की नियुक्ति का आदेश दिया था. इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र Government को समन जारी कर 8 हफ्ते में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है.
गौरतलब है कि दिल्ली जिमखाना क्लब ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केंद्र Government के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें लुटियंस दिल्ली स्थित सफदरजंग रोड पर बने क्लब के 27.3 एकड़ परिसर को ‘सार्वजनिक सुरक्षा’ के नाम पर अपने कब्जे में लेने की बात कही गई है. यह परिसर Prime Minister के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के पास स्थित है. केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने भूमि एवं विकास कार्यालय के जरिए क्लब प्रबंधन को बेदखली का नोटिस भेजा है.
बता दें कि 1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है. यह लंबे समय से वरिष्ठ अधिकारियों, राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों का प्रमुख केंद्र रहा है. क्लब का मौजूदा परिसर 1930 के दशक की शुरुआत में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल ने तैयार किया था. इस खास क्लब में करीब 5,600 स्थायी सदस्य हैं. इसकी सदस्यता के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट है और बताया जाता है कि कई लोग सदस्य बनने के लिए दशकों से इंतजार कर रहे हैं.
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ओपी/पीएम