‘न पी सकते हैं, न नहा सकते हैं’… दिल्ली के हरिनगर के लोगों का दूषित पानी को लेकर फूटा गुस्सा

New Delhi, 16 जुलाई . राजधानी दिल्ली के हरिनगर इलाके के आशा पार्क, फतेह नगर और आसपास की कॉलोनियों के निवासियों ने पिछले दो महीनों से दूषित और सीवर मिला पानी मिलने का आरोप लगाया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों से लगातार बदबूदार, पीले और काले रंग का पानी आ रहा है, जिससे पीने, नहाने, खाना बनाने और अन्य घरेलू काम करना मुश्किल हो गया है. लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर समस्या की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए तत्काल समाधान की मांग की है.

स्थानीय निवासी मंजीत सिंह ने बताया कि आशा पार्क और फतेह नगर दोनों क्षेत्रों में नलों से सीवर मिला पानी आ रहा है. उन्होंने कहा कि पानी से इतनी तेज बदबू आती है कि उसका इस्तेमाल करना संभव नहीं है. उनके मुताबिक, सड़कों पर भी कई जगह पानी भर गया है, जिससे हालात और खराब हो गए हैं.

मंजीत सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार स्थानीय विधायक श्याम शर्मा से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला. उनका कहना है कि लोग पीने के लिए दूसरे इलाकों से बोतलों में पानी लाने को मजबूर हैं. उन्होंने बताया कि गंदे पानी के कारण वे कई दिनों से ठीक से नहा भी नहीं पाए हैं. एक वरिष्ठ नागरिक होने के नाते उन्हें सबसे ज्यादा चिंता बच्चों और बुजुर्गों की सेहत की है.

उन्होंने कहा कि गंदा पानी घरों की टंकियों में भर जाता है, जिसके बाद लोगों को बार-बार टंकियां साफ करानी पड़ रही हैं. पहले जहां टंकी की सफाई का खर्च कम था, वहीं अब सफाई करने वाले 1,500 से 3,000 रुपये तक मांग रहे हैं. इसके बावजूद अगले ही दिन फिर वही गंदा पानी टंकी में भर जाता है.

एक अन्य निवासी पवन सिंह ने कहा कि पानी जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत है, लेकिन इलाके में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया है. उनका कहना है कि सीवर की बदबू पूरे इलाके में फैली हुई है और लोग अपने रिश्तेदारों को भी घर बुलाने से बच रहे हैं.

उन्होंने बताया कि शुरुआत में नलों से केवल बदबूदार और पीले रंग का पानी आता था, लेकिन अब कई बार काले रंग का पानी भी आने लगा है. ऐसे पानी का न तो पीने में इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही खाना बनाने या नहाने में. उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है.

स्थानीय दुकानदार हरपाल ने बताया कि गंदे पानी का असर उनके कारोबार पर भी पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि पानी की समस्या के कारण ग्राहक कम आने लगे हैं. लोगों को साफ पानी नहीं मिल रहा है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है. उनका कहना है कि जब मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो व्यापार चलाना भी मुश्किल हो जाएगा.

वहीं, आशा पार्क निवासी जितेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले दो-तीन महीनों से निगम के पानी में गंदगी आ रही थी. इससे बचने के लिए उन्होंने घर में सबमर्सिबल पंप लगवाया, लेकिन उसमें भी पहले से ज्यादा गंदा पानी आने लगा. उन्होंने चिंता जताई कि लगातार जलभराव के कारण पानी घरों की नींव तक पहुंच रहा है, जिससे इमारतों की मजबूती पर भी खतरा पैदा हो सकता है.

जितेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें सप्ताह में कई बार पानी की टंकी साफ करानी पड़ रही है, लेकिन हर बार कुछ ही घंटों में टंकी फिर गंदे पानी से भर जाती है. उन्होंने कहा कि टंकी साफ करने वाले पहले 500 रुपये लेते थे, लेकिन अब बढ़ती मांग के कारण 1,000 से 1,500 रुपये तक वसूल रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि लोग आखिर कब तक बाहर से पानी खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी करेंगे. पीने के अलावा खाना बनाना, बर्तन धोना, कपड़े धोना और नहाना भी बड़ी समस्या बन गया है. जिन लोगों के घर दूसरी या तीसरी मंजिल पर हैं, उन्हें नीचे से पानी ढोना पड़ता है, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है.

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से हर दिन केवल आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है.

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पीआईएम/पीएम

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