बीपीएससी परीक्षा में 999वीं रैंक लाकर बक्सर की पूजा बनीं डीएसपी, बताया सफलता का मूलमंत्र

Patna, 26 जून . प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बिहार के बक्सर जिले की पूजा कुमारी एक प्रेरणा हैं. कई छात्र असफलता मिलने पर हार मान लेते हैं और तैयारी छोड़ देते हैं, लेकिन पूजा ने हार नहीं मानी. उन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 999वीं रैंक हासिल कर डीएसपी पद प्राप्त किया.

पूजा इससे पहले छह बार बीपीएससी और यूपीएससी परीक्षा में भी बैठ चुकी हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली. फिर भी उन्होंने तैयारी जारी रखी और खुद पर विश्वास बनाए रखा कि एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेगी. उनकी सफलता के बाद गांव में खुशी का माहौल है. परिवार और ग्रामीण अब अपनी लड़कियों को पूजा जैसा बनाने के सपने देख रहे हैं.

से बातचीत में पूजा कुमारी ने बताया कि वे बक्सर जिले के केसठ गांव की रहने वाली हैं. उनके पिता किसान हैं और माता गृहिणी हैं.

पूजा ने बताया कि उन्होंने लगभग 7-8 वर्षों तक डीएसपी पद के लिए तैयारी की. 64वीं बीपीएससी में वे इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन चयन नहीं हो सका. 65वीं में प्रीलिम्स ही नहीं निकला. 66वीं में मेन्स दिया, लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद तीन बार प्रीलिम्स में ही अटक गईं. आखिरकार 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 999वीं रैंक हासिल कर उन्होंने डीएसपी पद हासिल कर लिया.

उन्होंने कहा कि हर बार असफलता पर लगता था कि अब कभी सफलता नहीं मिलेगी, लेकिन माता-पिता और परिवार के लगातार प्रोत्साहन से मैंने हिम्मत नहीं हारी. पूजा ने कोचिंग पर निर्भर रहने की बजाय स्व-अध्ययन पर ज्यादा भरोसा किया.उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय, कैमूर से शिक्षा शुरू की. इसके बाद इग्नू से बीए पूरा किया. यूपीएससी की तैयारी भी की, लेकिन सफलता नहीं मिली.

छात्रों को सलाह देते हुए पूजा ने कहा, “कभी उम्मीद न छोड़ें. एनसीईआरटी की किताबें बेसिक्स के लिए बहुत जरूरी हैं. पॉलिटी के लिए लक्ष्मीकांत और भूगोल के लिए भड़वाल की किताब पढ़ें. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र अवश्य हल करें. करंट अफेयर्स पर बहुत ज्यादा समय न लगाएं. रोज एक घंटा पर्याप्त है.

पूजा ने अपनी सफलता का श्रेय मुख्य रूप से माता-पिता और पूरे परिवार को दिया. उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान पूरा परिवार उनके साथ खड़ा रहा. उनकी बहन और भाई ने भी हरसंभव मदद की.

उन्होंने कहा कि परीक्षा का परिणाम कैसा आया, यह देखकर सफर को रोकना नहीं चाहिए, क्योंकि जो रुक गया उसका विकास नहीं होगा, चलने वाले ही विकास कर पाते हैं.

डीकेएम/वीसी

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