भाजपा नेताओं ने लखनऊ की सड़कों पर निकाली जनआक्रोश महिला पदयात्रा, कहा- ‘राहुल-अखिलेश ने छीना महिलाओं का हक’

Lucknow, 21 अप्रैल . उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में महिला आरक्षण को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली गई. इस पदयात्रा में उपChief Minister ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य सहित भाजपा के वरिष्ठ नेता भी शामिल रहे. यह पदयात्रा Chief Minister आवास से शुरू होकर उत्तर प्रदेश विधानसभा तक निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया.

जन आक्रोश महिला पदयात्रा में यूपी Government के मंत्री आशीष सिंह पटेल ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ को सभी दलों के सहयोग से पारित किया गया था और उस समय किसी प्रकार का विरोध नहीं हुआ था.

उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस अधिनियम को लागू करने की बारी आई, तब विपक्षी दलों ने इसका विरोध क्यों किया. उनके अनुसार, यह महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक सुनियोजित रणनीति है, जिससे उन्हें उनका हक न मिल सके.

वहीं, मंत्री बेबीरानी मौर्य ने कांग्रेस और Samajwadi Party पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि संसद में महिलाओं का अपमान किया गया है. जब महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने की उम्मीद थी, तब विपक्षी नेताओं राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने इस बिल को गिराने में भूमिका निभाई. उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव में महिलाएं इसका जवाब देंगी.

राज्य Government के मंत्री अनिल कुमार ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की महिलाएं इस मुद्दे को लेकर आक्रोशित हैं. उन्होंने कहा कि Prime Minister Narendra Modi महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते थे लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह संभव नहीं हो सका. उनके अनुसार, यही कारण है कि आज महिलाएं सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जता रही हैं.

मंत्री रजनी तिवारी और ओमप्रकाश राजभर ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष की आलोचना की. उन्होंने कहा कि महिलाओं में भारी नाराजगी है और इसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिलेगा.

Lucknow की मेयर सुषमा खरकवाल ने भी विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदियों से महिलाएं अपने अधिकारों की मांग कर रही हैं लेकिन जब उन्हें उनका हिस्सा मिलने का अवसर आया, तो विरोध शुरू हो गया. उन्होंने कहा कि देशहित में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को मिलकर काम करना चाहिए.

इस पदयात्रा में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव भी शामिल हुईं. उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं के लिए बेहद जरूरी था और इसके पारित न होने से महिलाओं में गहरा आक्रोश है. उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के बावजूद हजारों महिलाएं इस पदयात्रा में शामिल हुईं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है.

महिला आयोग की सदस्य पुष्पा पांडे ने भी विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. कुल मिलाकर, ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ ने यह स्पष्ट कर दिया कि महिला आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में राजनीति का एक बड़ा केंद्र बिंदु बनने वाला है.

एसएके/पीएम

Leave a Comment