
कोलकाता, 4 मई . पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में पूर्व बर्धमान जिले की मोंटेश्वर विधानसभा सीट पर रिकॉर्ड 93.56 प्रतिशत मतदान हुआ था. इस सीट पर भाजपा के युवा उम्मीदवार सैकत पांजा ने भारी मतों से जीत हासिल कर ली है. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 14,798 वोटों से हराया.
सैकत पांजा को 96,559 वोट मिले, जबकि टीएमसी उम्मीदवार सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 81,761 वोट प्राप्त हुए. सीपीआई (एम) के अनुपम घोष को 18,192 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस के ज्योतिर्मय मंडल को बहुत कम वोट मिले. पूरे पूर्व बर्धमान जिले में औसतन 93.83 प्रतिशत मतदान हुआ, जो इस बार के चुनाव में सबसे अधिक में से एक है.
मोंटेश्वर एक सामान्य श्रेणी की सीट है, जो बर्धमान-दुर्गापुर Lok Sabha क्षेत्र के अंतर्गत आती है. 2008 के परिसीमन के बाद इसकी मौजूदा संरचना बनी. इस सीट का Political इतिहास काफी दिलचस्प रहा है. शुरुआती दशकों में यहां वाम मोर्चा का दबदबा रहा और सीपीआई (एम) ने कई बार जीत दर्ज की. बाद में तृणमूल कांग्रेस ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की. 2021 के चुनाव में सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने भाजपा के सैकत पांजा को 31,508 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी.
इस बार भाजपा ने 34 वर्षीय सैकत पांजा पर भरोसा जताया. पोस्ट ग्रेजुएट पांजा पहले सीपीएम से जुड़े रहे और बाद में भाजपा में शामिल हुए. उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं और उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.6 लाख रुपए है.
दूसरी ओर, टीएमसी के 76 वर्षीय सिद्दीकुल्लाह चौधरी पोस्ट ग्रेजुएट हैं. उनके खिलाफ एक मामला दर्ज है और उनकी संपत्ति करीब 1.8 करोड़ रुपए बताई गई है. सीपीआई (एम) के 42 वर्षीय अनुपम घोष ग्रेजुएट हैं, उनके खिलाफ कोई आपराधिक केस नहीं है और कुल संपत्ति 10.6 लाख रुपए है. कांग्रेस के ज्योतिर्मय मंडल 56 वर्षीय हैं और 12वीं पास हैं.
मोंटेश्वर सीट पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी मतदाताओं का मिश्रण है. इस बार भारी मतदान ने शुरुआत से ही संकेत दे दिया था कि मुकाबला रोचक होगा. भाजपा ने एंटी-इनकंबेंसी और स्थानीय मुद्दों को लेकर अच्छी रणनीति अपनाई, जिसका फायदा उन्हें मिला. वाम दल और कांग्रेस की वोट कटौती भी भाजपा के पक्ष में गई.
सैकत पांजा की जीत युवा चेहरे और संगठनात्मक प्रयासों का परिणाम है. वहीं टीएमसी को अपने पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखने में चुनौती का सामना करना पड़ा. मोंटेश्वर का नतीजा न सिर्फ स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की राजनीति के समीकरण को प्रभावित करता है.
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एससीएच/वीसी