
गांधीनगर, 3 जुलाई . Gujarat Government ने Friday को बिजली पारेषण (पावर ट्रांसमिशन) अवसंरचना से प्रभावित कृषि भूमि के लिए मुआवजा नीति में बड़ा बदलाव करने की घोषणा की. Government ने मौजूदा जंत्री (Governmentी मूल्यांकन) आधारित मुआवजा व्यवस्था को समाप्त कर अब भूमि के प्रचलित बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा देने का फैसला किया है.
Government ने फैसला किया है कि बिजली ट्रांसमिशन लाइन और टावरों के लिए उपयोग की जाने वाली जमीन पर किसानों को उसकी बाजार कीमत का दोगुना मुआवजा मिलेगा. साथ ही पूरा मुआवजा एकमुश्त दिया जाएगा, जबकि पहले यह किस्तों में दिया जाता था.
Governmentी अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय Chief Minister भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और उपChief Minister हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में किसानों के साथ हुई चर्चा और परामर्श के बाद लिया गया. इस प्रक्रिया में कृषि मंत्री जीतू वाघानी, ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल और ऊर्जा राज्य मंत्री कौशिक वेकारिया भी शामिल रहे.
अब तक कृषि भूमि से गुजरने वाली बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के लिए मुआवजा जमीन की जन्त्री कीमत का 200 प्रतिशत दिया जाता था. नई व्यवस्था में यह मुआवजा जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य का दोगुना होगा.
Government ने बताया कि विभिन्न किसान संगठनों की ओर से मुआवजा निर्धारण के लिए अधिक व्यावहारिक और वास्तविक आधार अपनाने की मांग की जा रही थी, जिसके बाद यह बदलाव किया गया.
बिजली ट्रांसमिशन टावरों से प्रभावित भूमि के मुआवजे की गणना में भी बदलाव किया गया है. पहले केवल टावर की नींव (फाउंडेशन) के वास्तविक क्षेत्रफल के आधार पर मुआवजा दिया जाता था. नई नीति के तहत टावर के आधार क्षेत्र के चारों ओर एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को भी मुआवजा योग्य क्षेत्र में शामिल किया जाएगा.
उदाहरण के तौर पर, 765 केवी ट्रांसमिशन लाइन के एक टावर के लिए पहले 625 वर्गमीटर क्षेत्र पर मुआवजा मिलता था. अब चारों तरफ एक-एक मीटर अतिरिक्त क्षेत्र जोड़ने के बाद 729 वर्गमीटर क्षेत्र पर मुआवजा दिया जाएगा.
Government ने भुगतान की प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है. पहले भूमि मालिकों को 40 प्रतिशत राशि टावर की नींव बनने के दौरान 40 प्रतिशत टावर खड़ा होने पर और शेष 20 प्रतिशत बिजली तार बिछाने के बाद दी जाती थी.
नई नीति के तहत पात्र भूमि मालिकों को 100 प्रतिशत मुआवजा एकमुश्त दिया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत भूमि का बाजार मूल्य तय करने के लिए मार्केट रेट कमेटी (एमआरसी) का गठन किया जाएगा. Government का कहना है कि इस समिति का उद्देश्य जमीन के बाजार मूल्य का पारदर्शी और निष्पक्ष निर्धारण सुनिश्चित करना है.
नई नीति में ट्रांसमिशन लाइन के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) कॉरिडोर के लिए भी मुआवजा तय किया गया है. एमआरसी द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों में 30 प्रतिशत, नगरपालिका क्षेत्रों में 45 प्रतिशत और नगर निगम क्षेत्रों में 60 प्रतिशत मुआवजा दिया जाएगा.
Government ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन किसानों को पुरानी नीति के तहत पहले ही मुआवजा मिल चुका है, लेकिन जिनकी परियोजनाएं अभी भी निर्माणाधीन हैं, वे भी संशोधित मुआवजा नीति का लाभ पाने के पात्र होंगे.
Government के अनुसार, प्रभावित किसानों और अधिकृत मूल्यांकनकर्ताओं को एमआरसी में शामिल करने से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी. यह संशोधित नीति Gujarat में बिजली ट्रांसमिशन लाइनों और टावरों से जुड़ी सभी परियोजनाओं पर लागू होगी.
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एएमटी/वीसी