भरत कुमार छेत्री: भारतीय हॉकी का ‘कमबैक किंग’, लंदन ओलंपिक में की भारतीय टीम की कप्तानी

New Delhi, 14 दिसंबर . भारतीय हॉकी टीम का इतिहास स्वर्णिम रहा है. भारतीय हॉकी की यात्रा में हर दौर में ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने अपने खेल से हॉकी में नई जान फूंकने में अपना योगदान दिया है. भरत कुमार छेत्री एक ऐसा ही नाम है.

भरत कुमार छेत्री का जन्म 15 दिसंबर 1981 को कालिमपोंग, पश्चिम बंगाल में हुआ था. भरत के पिता भारतीय सेना में कार्यरत थे. सैन्य पृष्ठभूमि का होने की वजह से बचपन में ही भरत में कुछ साहसिक करने का जज्बा था. हॉकी का शुरुआती प्रशिक्षण दानापुर आर्मी स्कूल में लेने वाले भरत ने 1998 में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, Bengaluru में हिस्सा लिया.

2001 में भरत छेत्री ने ढाका में Prime Minister गोल्ड कप से अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया. वह गोलकीपर थे. यह वह दौर था, जब भारतीय हॉकी अपने स्वर्णिम इतिहास से बहुत दूर संघर्ष और विफलता के रास्ते पर थे, लेकिन भरत जैसे खिलाड़ियों ने खेल को उसका पुराना गौरव दिलाने की भरपूर कोशिश की. इसमें कभी सफलता तो कभी असफलता मिली. 2004, 2007, 2009 में ऐसा भी समय आया जब उन्हें राष्ट्रीय टीम से बाहर कर दिया गया, लेकिन हर बार उन्होंने जोरदार वापसी की. इसी वजह से उन्हें ‘कमबैक किंग’ भी कहा जाता है.

छेत्री को 2011 में पहली बार भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया. 2012 में भारतीय टीम ने उनकी कप्तानी में सुल्तान अजलान शाह कप में कांस्य पदक जीता. 2012 लंदन ओलंपिक में छेत्री भारतीय टीम के कप्तान थे. वे भारतीय हॉकी इतिहास में पहले गोलकीपर हैं जिन्होंने ओलंपिक में टीम की कप्तानी की. लंदन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था और इसके बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया.

संन्यास के बाद छेत्री कोचिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे भारतीय पुरुष और महिला टीमों के सहायक कोच रह चुके हैं. 2018 में उन्हें खेल में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए प्रतिष्ठित ध्यानचंद अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. भारतीय हॉकी को मजबूत करने और युवाओं को बेहतर प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से वह कालिमपोंग में अपनी हॉकी अकादमी चला रहे हैं.

पीएके

Leave a Comment