
कोलकाता, 21 अप्रैल . कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अरिजीत बंदोपाध्याय और न्यायमूर्ति अपूर्वा सिन्हा रॉय की खंडपीठ ने Tuesday को उस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया कि क्या इस वर्ष जनवरी में अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा से संबंधित मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 की धाराएं लागू होगी.
अब इस मामले को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल के पास भेज दिया गया है.
जस्टिस बंदोपाध्याय और जस्टिस रॉय की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग करते हुए टिप्पणी की कि यूएपीए की धाराएं लागू होंगी या नहीं, इसका फैसला केवल कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ही कर सकती है.
हालांकि, जस्टिस बंदोपाध्याय और जस्टिस रॉय की डिवीजन बेंच ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने इस मामले में 35 आरोपियों में से 15 को सशर्त जमानत दी थी.
अपनी याचिका में, एनआईए ने तर्क दिया था कि एजेंसी Supreme Court के निर्देश के अनुसार जांच कर रही है, इसलिए निचली अदालत जांच के दौरान इस तरह से जमानत नहीं दे सकती थी.
सुनवाई के अंत में, डिवीजन बेंच ने टिप्पणी की कि यदि एनआईए 15 आरोपियों की जमानत के खिलाफ अपने तर्कों के समर्थन में पर्याप्त सबूत पेश कर पाती है, तो उनकी जमानत निश्चित रूप से रद्द कर दी जाएगी.
पिछले Saturday को, एनआईए की एक विशेष अदालत ने इस साल की शुरुआत में मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में भड़की हिंसा के सिलसिले में 35 आरोपियों में से 15 को सशर्त जमानत दी थी.
यह हिंसा पड़ोसी राज्य Jharkhand में एक प्रवासी मजदूर की मौत को लेकर भड़की थी. प्रवासी मजदूर का शव बेलडांगा पहुंचने के बाद तनाव बढ़ गया था.
स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रवासी मजदूर की Jharkhand में धार्मिक और भाषाई कारणों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. विरोध प्रदर्शन बेलडांगा में रेलवे पटरियों और सड़कों को जाम करने के साथ शुरू हुए.
जब Police ने नाकाबंदी हटाने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर घात लगाकर हमला कर दिया. प्रदर्शनकारियों ने कुछ पत्रकारों पर भी हमला किया, जिनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में, Jharkhand Police ने एक बयान जारी किया, जिसमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रवासी मजदूर की मौत को आत्महत्या का मामला बताया गया.
–
एएसएच/एबीएम