विधानसभा चुनाव से पहले डीके शिवकुमार ने असम भाजपा में भ्रष्टाचार व असंतोष का लगाया आरोप

Bengaluru, 28 मार्च . असम विधानसभा चुनाव से पहले कर्नाटक के उपChief Minister और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य में बड़े बदलाव का दावा किया है.

Bengaluru के केंपेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत में डीके शिवकुमार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों से भाजपा के शासन वाले असम में भ्रष्टाचार बढ़ा है और आम जनता परेशान है. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चुनाव में किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं, जिससे लोगों में नाराजगी है और वे बदलाव चाहते हैं.

डीके शिवकुमार को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने असम चुनाव के लिए वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. उन्होंने कहा कि वह चुनाव प्रचार के लिए असम जा रहे हैं. इसके अलावा उन्हें केरल का दौरा करना है और कर्नाटक में उपचुनावों की निगरानी भी करनी है.

उन्होंने असम Government पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य का प्रशासन पूरी तरह चरमरा गया है. पिछले एक दशक में जनता के लिए कोई ठोस विकास नहीं हुआ. हाल ही में हुए कैबिनेट फेरबदल के बाद असम भाजपा के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं.

डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर कोई भी नेता खुश नहीं है और कई कार्यकर्ता खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “भाजपा के नेता मानते हैं कि उन्हें पार्टी में अवसर नहीं मिल रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है.”

Chief Minister हिमंता बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली Government पर निशाना साधते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि असम के सभी मंत्रियों ने राज्य को लूटा है और आम आदमी को पिछले 10 सालों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि जाति और जमीन से जुड़े मुद्दों पर किए गए वादे भी अधूरे ही रह गए हैं.

उन्होंने दावा किया कि उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद बीजेपी के अंदर भारी विवाद और असंतोष देखने को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर लड़ाई चल रही है और कोई भी संतुष्ट नहीं है. कांग्रेस को लेकर उन्होंने भरोसा जताया कि असम में सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लहर है और जनता बदलाव चाहती है.

वहीं, असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोराह को भाजपा में शामिल किए जाने की खबरों पर तंज कसते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि अगर भाजपा इतनी मजबूत होती, तो उसे कांग्रेस नेताओं को अपने साथ लाने की जरूरत नहीं पड़ती.

उन्होंने दावा किया कि भूपेन बोराह के भाजपा में शामिल होने के बाद उनके साथ एक भी कार्यकर्ता नहीं गया, जो दर्शाता है कि चुनाव से पहले भाजपा की पकड़ कमजोर हो रही है.

वीकेयू/पीएम

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