‘बंकिम दा ने हीन भावना को झकझोरा,’ लोकसभा में बोले पीएम मोदी

New Delhi, 8 दिसंबर . 18वीं Lok Sabha के शीतकालीन सत्र के 8वें दिन Monday को Prime Minister Narendra Modi ने Lok Sabha में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा की शुरुआत की. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत या Political नारा नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम और मातृभूमि की आजादी के लिए एक पवित्र संघर्ष का प्रतीक था.

पीएम मोदी ने Lok Sabha में कहा, “बंकिम दा ने जब ‘वंदे मातरम्’ की रचना की तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया. तब पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, ‘वंदे मातरम्’ हर भारतीय का संकल्प बन गया. इसलिए वंदे मातरम् की स्तुति में लिखा गया था कि मातृभूमि की स्वतंत्रता की वेदी पर, मोद में स्वार्थ का बलिदान है. यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है. सजीवन मंत्र भी, विजय का विस्तृत मंत्र भी. यह शक्ति का आह्वान है. यह ‘वंदे मातरम्’ है. उष्ण शोणित से लिखो, वत्स स्थली को चीरकर वीर का अभिमान है. यह शब्द ‘वंदे मातरम्’ है.”

Prime Minister मोदी ने बताया कि ‘वंदे मातरम्’ उस समय लिखा गया था, जब 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिश Government सतर्क थी और हर स्तर पर दबाव और अत्याचार की नीतियां लागू कर रही थी. उस दौर में ब्रिटिश राष्ट्रगान ‘गॉड सेव द क्वीन’ को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम चल रही थी. ऐसे समय में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपनी लेखनी से जवाब देते हुए ‘वंदे मातरम्’ लिखा और भारतीयों में साहस और आत्मविश्वास की नई लहर पैदा की.

Prime Minister ने कहा, “जब हम ‘वंदे मातरम्’ कहते हैं, तो यह हमें वैदिक युग की संस्कृति की याद दिलाता है. वेदों में कहा गया है कि माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः, अर्थात यह भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं. यही विचार भगवान राम ने भी व्यक्त किया था, जब उन्होंने कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी. आज ‘वंदे मातरम्’ इसी महान सांस्कृतिक परंपरा का आधुनिक रूप है.”

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् केवल अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई का मंत्र नहीं था, बल्कि यह मातृभूमि की मुक्ति की पवित्र जंग का प्रतीक था. यह गीत उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के साहस और बलिदान का सम्मान करता है जिन्होंने इसे अपने आंदोलन का हिस्सा बनाया.

Prime Minister ने सदन में सभी सांसदों से कहा कि इस अवसर पर पक्ष-प्रतिपक्ष का कोई भेदभाव नहीं है, क्योंकि यह समय है ‘वंदे मातरम्’ के ऋण को स्वीकार करने का, जो हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने बलिदानों से पूरा किया. उन्होंने याद दिलाया कि आज India में जो लोकतांत्रिक व्यवस्था और आजादी है, वह इसी आंदोलन का परिणाम है.

Prime Minister मोदी ने कहा, “संसद में बैठे सभी सांसदों के लिए यह अवसर है कि वे इस ऋण को स्वीकार करें और उस पवित्र संघर्ष को याद करें, जिसने हमारी मातृभूमि को स्वतंत्र कराया.”

वीकेयू/एएस

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