दाभोलकर हत्या मामले में दोषी ठहराए गए सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत, सनातन संस्था ने किया स्वागत

Mumbai , 18 अगस्त . डॉ. नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए सचिन अंदुरे को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली है. कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए जमानत दे दी है. यह फैसला न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिंह भोसले की खंडपीठ ने सुनाया.

सचिन अंदुरे ने विशेष अदालत से मिली सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी. वहीं, दाभोलकर परिवार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए अलग याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया और अंदुरे को जमानत दे दी.

इस फैसले का सनातन संस्था ने स्वागत किया है. संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने कहा कि अदालत का फैसला ‘सत्य की जीत’ है. उन्होंने दावा किया कि मामले की जांच में कई गंभीर खामियां थीं, जिन्हें अदालत के समक्ष रखा गया.

अंदुरे की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन प्रधान ने अदालत में दलील दी कि मामले में कई महत्वपूर्ण जांच संबंधी कमियां थीं. बचाव पक्ष के अनुसार, सीबीआई ने इस मामले में पहचान परेड नहीं कराई थी और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयानों में भी विरोधाभास था. कुछ गवाहों ने अंदुरे को घटनास्थल पर देखने का दावा किया, जबकि अन्य ने कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थे.

बचाव पक्ष ने अदालत के सामने जांच प्रक्रिया में कथित खामियों का भी जिक्र किया. इन्हीं तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए सजा पर रोक लगाई. इससे पहले इसी मामले में अप्रैल 2026 में शरद कलस्कर को भी हाईकोर्ट से जमानत मिली थी.

सनातन संस्था ने अपने बयान में कहा कि दाभोलकर की हत्या के बाद बिना ठोस सबूतों के वैचारिक आधार पर संस्था और हिंदुत्व से जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया. संस्था ने उल्लेख किया कि इस मामले में पहले विशेष अदालत डॉ. वीरेंद्र तावड़े, अधिवक्ता संजीव पुनालेकर और विक्रम भावे को बरी कर चुकी है.

अभय वर्तक ने कहा कि सचिन अंदुरे की गिरफ्तारी के समय उनकी बेटी केवल छह महीने की थी और अब वह आठ वर्ष की हो चुकी है. परिवार ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया है.

एएमटी/एबीएम

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