
मनामा, 2 जून . बहरीन ने क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने नागरिकों को अगली सूचना जारी होने तक ईरान और इराक की यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है, यह जानकारी आंतरिक मंत्रालय ने दी है.
सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बहरीन के आंतरिक मंत्रालय की ओर से जारी बयान के हवाले से बताया कि इलाके में बढ़ते टकराव, ईरानी हमलों और सुरक्षा कारणों के चलते पाबंदी का फैसला लिया गया है. मंत्रालय ने कहा कि अगले आदेश तक यथास्थिति बनी रहेगी और जिसने भी इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
एडवाइजरी से एक दिन पहले ही यानी 1 जून 2026 को ईरान द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया गया था. हालांकि कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश मिसाइलों और ड्रोन्स को इंटरसेप्ट कर हवा में ही नष्ट कर दिया.
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू किए थे. इसके बाद तेहरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की गई थी. ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी प्रतिष्ठानों और एयरबेस को निशाना बनाया था. इन हमलों में इन देशों को भी जान-माल का काफी नुकसान हुआ था.
सिंहुआ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और इराक में ईरान समर्थक समूहों ने खाड़ी देशों पर हमले किए, जिनमें बहरीन भी शामिल रहा था. इस दौरान मनामा (राजधानी) में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय, एल्युमिनियम संयंत्रों और प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया था.
40 दिनी संघर्ष के दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी ईरान ने बंद कर दिया था, जिससे दुनिया को तेल और ऊर्जा संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. बाद में अमेरिका ने भी जवाब में इस स्ट्रेट पर नाकेबंदी का ऐलान कर दिया था. 8 मई को अस्थायी संघर्ष विराम का ऐलान किया गया. इसके बाद इस्लामाबाद टॉक्स के जरिए स्थायी समाधान ढूंढने की कोशिश हुई, जिसमें अब तक कुछ खास कामयाबी नहीं मिल पाई है.
हाल ही में अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान के गोरुक शहर और केशम द्वीप स्थित ईरानी रडार और ड्रोन नियंत्रण साइट्स पर हमले किए थे. कहा गया यह कार्रवाई आत्मरक्षा के लिए की गई थी. जिसके बाद मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति फिर बन गई है.
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केआर/