अशोक गहलोत ने श्रमिकों की स्थिति पर चिंता जताई, बंगाल के एग्जिट पोल को किया खारिज

jaipur, 1 मई . Rajasthan के पूर्व Chief Minister अशोक गहलोत ने अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर पूरे देश में, विशेष रूप से Rajasthan में, श्रमिकों की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की.

साथ ही, उन्होंने हाल के Political घटनाक्रमों पर भी टिप्पणी की, जिसमें पश्चिम बंगाल से जुड़े एग्जिट पोल्स भी शामिल थे.

गहलोत ने सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि श्रमिकों की स्थिति ‘बेहद गंभीर’ बनी हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई श्रमिकों को अभी भी वैधानिक न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल रही है. उन्होंने कहा कि यह वास्तव में एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.

उन्होंने नोएडा (उत्तर प्रदेश) में हाल ही में हुए श्रमिक अशांति का जिक्र करते हुए इसे Governmentों और नियोक्ताओं, दोनों के लिए एक ‘चेतावनी’ बताया. उन्होंने कहा कि श्रमिकों का कल्याण सुनिश्चित करना एक कानूनी और नैतिक, दोनों तरह की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि पूरे देश में स्थिति बेहद चिंताजनक है.

Rajasthan पर विशेष रूप से प्रकाश डालते हुए गहलोत ने दावा किया कि मजदूरी दरों के मामले में यह राज्य सबसे निचले पायदान पर है. यह खेदजनक है. मैंने Chief Minister को पत्र लिखकर श्रमिकों के बीच सौहार्द और गरिमा को बढ़ावा देने के लिए मजदूरी बढ़ाने का आग्रह किया है.

कांग्रेस नेता ने पिछली राज्य Government द्वारा ‘गिग वर्कर्स’ (अस्थायी श्रमिकों) के लिए लाए गए कानून के बारे में भी बात की. उन्होंने इसे एक अग्रणी कदम बताया, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली थी. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रशासन इस कानून को लागू करने में विफल रहा है. आवश्यक नियम नहीं बनाए गए हैं, और यह कानून प्रभावी रूप से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है.

गहलोत ने सिलिकोसिस की समस्या की स्थिति को ‘बेहद नाजुक” बताया और खनन क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि खदान मालिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रमिक सुरक्षा उपकरण का उपयोग करें और दिशानिर्देशों का पालन करें.

उन्होंने कहा कि असली सवाल यह है कि आखिर श्रमिकों को यह बीमारी क्यों हो रही है?

इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल में शुरू किए गए मुआवजे के उपायों को भी याद किया. गहलोत ने सिलिकोसिस के सामाजिक प्रभाव को भी उजागर किया और प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में विधवा महिलाओं के उदाहरण दिए. उन्होंने घोषणा की कि वह व्यक्तिगत रूप से ऐसे क्षेत्रों का दौरा करेंगे ताकि जागरूकता फैलाई जा सके और Government पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया जा सके.

गहलोत ने जाति जनगणना की रिपोर्टों के मुद्दे पर कहा कि 4 मई के बाद आधिकारिक स्पष्टता आने तक इंतजार करना ही उचित होगा, उसके बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए.

पश्चिम बंगाल से जुड़े एग्जिट पोल्स पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में, उन्होंने उनकी विश्वसनीयता को सिरे से खारिज कर दिया. गहलोत ने कहा कि असल में कोई भी एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करता. कभी-कभी वे सही साबित होते हैं, तो कभी गलत. उनका कोई महत्व नहीं होता.

एएसएच/एबीएम

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