
New Delhi, 21 अगस्त . केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने Friday को कहा कि एप्पल India में आईफोन के अलावा अन्य उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग भी शुरू कर सकता है. साथ ही, Government तीन संभावित भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों के साथ काम कर रही है, जो अगले 10-14 महीनों में बाजार में उभर सकती हैं.
मीडिया द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या एप्पल India में आईफोन के अलावा अन्य उत्पादों का निर्माण कर सकता है? इसका जवाब वैष्णव ने “हां” में दिया. इससे संकेत मिलता है कि India में कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग और उत्पाद इकोसिस्टम का और विस्तार हो सकता है.
Union Minister ने कहा कि Government को उम्मीद है कि भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड उभरेंगे और बाजार के अलग-अलग सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा करेंगे. देश में मजबूत घरेलू स्मार्टफोन इकोसिस्टम तैयार करने के प्रयासों के तहत Government ने तीन भारतीय कंपनियों से अपने-अपने सेगमेंट में सर्वश्रेष्ठ डिजाइन विकल्प विकसित करने को कहा है.
इन कंपनियों से यह भी पहचानने को कहा गया है कि वे किन सेगमेंट में सबसे बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकती हैं, जिनमें इकोनॉमी, प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम श्रेणियां शामिल हैं.
वैष्णव ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे बड़े वॉल्यूम वाले सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करना चाहती हैं.
हालांकि, Government इन कंपनियों को समर्थन देने से पहले उनकी बौद्धिक संपदा (आईपी) और उनके डिजाइन की गुणवत्ता का गहन मूल्यांकन करेगी.
वैष्णव ने कहा, “इस समय मुझे अगले 10-14 महीनों में तीन संभावित भारतीय स्मार्टफोन कंपनियां उभरती हुई दिखाई दे रही हैं.”
उनकी यह टिप्पणी Government द्वारा हाल ही में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को अधिसूचित किए जाने के बाद आई है. इस योजना का उद्देश्य घरेलू मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और भारतीय स्मार्टफोन ब्रांडों के उभरने में मदद करना है.
इस योजना को दो टारगेटेड सेगमेंट में बांटा गया है. टारगेट सेगमेंट-1 मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है, जबकि टारगेट सेगमेंट-2 का उद्देश्य भारतीय मोबाइल फोन ब्रांडों को समर्थन देना है.
दूसरे सेगमेंट के तहत आवेदन करने वाली कंपनियों को एक साल की तैयारी अवधि दी जाएगी. इससे उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन का दावा करने से पहले अपना कारोबार स्थापित करने और पात्रता की आवश्यकताओं को पूरा करने का समय मिलेगा.
एमपीएमएस के तहत India में पंजीकृत वे मोबाइल फोन निर्माता पात्र होंगे, जिनका वित्त वर्ष 2025-26 में कम से कम 10,000 करोड़ रुपए का कारोबार रहा हो. वित्तीय प्रोत्साहन की मांग करने वाले मौजूदा ब्रांडों को प्रत्येक उस वित्त वर्ष में, जिसमें वे प्रोत्साहन का दावा करेंगे, वित्त वर्ष 2025-26 की कुल बिक्री के मुकाबले 5,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बिक्री हासिल करनी होगी.
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनियों के लिए योजना में पात्रता हेतु वित्त वर्ष 2025-26 में न्यूनतम 1,000 करोड़ रुपए के कारोबार की सीमा तय की गई है.
Government का यह नया प्रयास ऐसे समय में आया है जब India एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग बेस की अपनी भूमिका से आगे बढ़कर एक मजबूत घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है. इसमें देश में डिजाइन किए गए और भारतीय ब्रांड वाले स्मार्टफोन का विकास भी शामिल है.
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एबीएस