
ढाका, 15 दिसंबर . बांग्लादेश में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, देश में हिंसा और तनाव का माहौल बढ़ रहा है. आए दिन हिंसा के मामले सामने आ रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि पत्रकार भी वहां सुरक्षित नहीं हैं.
पत्रकारों के अधिकार का भी हनन हो रहा है. बांग्लादेश के स्थानीय मीडिया ने Monday को बताया कि वरिष्ठ पत्रकार अनीस आलमगीर को ढाका मेट्रोपॉलिटन Police (डीएमपी) की डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) ने खास मुद्दों से जुड़ी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया. इसके बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई.
हाल के कुछ दिनों में बांग्लादेश में पत्रकारों पर हमले की घटना में बढ़ोतरी ने देश में प्रेस की आजादी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं. हफ्ते भर में ऑन-ड्यूटी पत्रकार रिसान पर हमले का मामला सामने आया. ढाका-8 से निर्दलीय उम्मीदवार और इकबाल मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान बिन हादी को दो बदमाशों ने दिन दहाड़े सिर पर गोली मार दी.
इसके बाद 12 दिसंबर की दोपहर को रिसान ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (डीएमसीएच) में हादी पर हुई गोलीबारी के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रहे थे, तभी छात्र से नेता बने हादी के समर्थकों ने उन पर हमला कर दिया.
जुलाई की शुरुआत में, बाहर से आए 88 पत्रकारों, लेखकों, शोधकर्ताओं, कल्चरल और राइट्स एक्टिविस्ट्स के एक समूह ने यूनुस की अंतरिम Government के तहत बांग्लादेश में “पत्रकारों पर लगातार टॉर्चर और बोलने की आजादी को दबाने” पर गंभीर चिंता जताई थी.
इस महीने की शुरुआत में, कई जाने-माने अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने बांग्लादेश में मानवाधिकार की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई. विशेषज्ञों ने दावा किया कि मानवाधिकारों के उल्लंघन बढ़ रहे हैं और Political बदला लेने के लिए झूठे और मनगढ़ंत शिकायतों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है.
कनाडा के थिंक टैंक संगठन ‘ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी)’ ने ‘बांग्लादेश इन क्राइसिस: ह्यूमन राइट्स, जस्टिस, एंड द फ्यूचर ऑफ डेमोक्रेसी’ नाम से एक वर्चुअल इंटरनेशनल सेमिनार आयोजित किया.
इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए. स्विट्जरलैंड के पब्लिक रेडियो की एडिटर, शार्लेट जैक्वेमर्ट ने बताया कि यूनुस की अंतरिम Government के तहत अगस्त 2024 और जुलाई 2025 के बीच पत्रकारों के खिलाफ 195 आपराधिक मामले दर्ज किए गए, जो पिछले साल की तुलना में 550 फीसदी ज्यादा है.
सेमिनार के बाद जीसीडीजी की ओर से जारी एक प्रेस स्टेटमेंट में कहा गया, “उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि इसी दौरान (अगस्त 2024 और जुलाई 2025 के बीच) 878 पत्रकारों को अलग-अलग तरह से परेशान किया गया. जैक्वेमर्ट ने पत्रकारों के खिलाफ दर्ज सभी मनगढ़ंत केस वापस लेने और गिरफ्तार किए गए लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग की.”
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केके/एएस