ईरान-अमेरिका संघर्ष : पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने साधे अपने आर्थिक और रणनीतिक हित

New Delhi, 20 जून . अमेरिका और ईरान में लगभग सौ से ज्यादा दिनों तक चले युद्ध के बाद समझौता हो गया. भले ही दोनों देशों ने हमले रोक दिए और होर्मुज फिर से ऑपरेशनल हो चुका है, लेकिन 28 फरवरी से लेकर 18 जून तक दुनिया के तमाम देशों को भी इसके प्रभाव का सामना करना पड़ा. इस दौरान India ने देश को नुकसान से बचाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़े रणनीतिक कदम उठाए हैं.

युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट की सप्लाई चैन बुरी तरह से प्रभावित हो रही थी. ऐसे में India ने अपने व्यापार का तेजी से विविधीकरण किया. व्यापार में विविधीकरण India की रणनीति रही है. अमेरिका के साथ तनाव से भरे संबंध और पश्चिम एशिया संकट के बीच India ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया. इसके अलावा, फरवरी 2026 में India ने अमेरिका के साथ बड़ा व्यापारिक समझौता किया.

फरवरी 2026 में India ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) (सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान, कुवैत, बहरीन) के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर हस्ताक्षर किए. पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट को देखते हुए India ने राजनयिक दबावों के बावजूद अपनी जरूरतों के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया.

इसके साथ ही, अमेरिका-ईरान हमलों के दौरान पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर India के हितों की रक्षा करने और नए गठबंधनों को मजबूत करने के लिए कई देशों का दौरा किया. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पहले Prime Minister मोदी ने मलेशिया का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने व्यापार और पाम ऑयल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की.

हमले की शुरुआत से ठीक पहले पीएम मोदी इजरायल पहुंचे थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने पर चर्चा हुई. हालांकि, इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भीषण हमला किया.

दोनों पक्षों की तरफ से जारी हमलों के बीच मई 2026 में पीएम मोदी ने एक साथ यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया. यूएई के साथ ऊर्जा आपूर्ति, जबकि यूरोपीय देशों (विशेषकर इटली) के साथ ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान के तहत क्रिटिकल मिनरल्स और डिफेंस डील की गईं.

अमेरिका और ईरान में समझौता होने से ठीक पहले पीएम मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा किया. नई व्यापारिक साझेदारियों, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और संतुलित कूटनीति के जरिए India ने यह संकेत दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उसका लक्ष्य केवल नुकसान से बचना नहीं, बल्कि नए अवसरों को साधना भी है.

केके/एबीएम

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