मजबूत आर्थिक वृद्धि और घटती महंगाई के बीच वित्त वर्ष 2027 में लंबे समय तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा आरबीआई: रिपोर्ट

New Delhi, 20 अगस्त . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) चालू वित्त वर्ष 2026-27 में नीतिगत ब्याज दरों को लंबे समय तक स्थिर रख सकता है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और महंगाई भी नियंत्रण के दायरे में है. ऐसे में केंद्रीय बैंक के पास फिलहाल ब्याज दरों में कोई त्वरित बदलाव करने का दबाव नहीं है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई की हालिया मौद्रिक नीति टिप्पणियों से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क है और नीति समिति के कुछ सदस्यों का रुख अपेक्षाकृत सख्त हुआ है. हालांकि मौजूदा आर्थिक आंकड़े ऐसी स्थिति नहीं दिखाते, जहां तुरंत ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता हो.

एसबीआई रिसर्च के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि दर आगे भी मजबूत बनी रहने की संभावना है. विभिन्न प्रमुख आर्थिक संकेतक इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है. इसी आधार पर संस्थान ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ब्याज दरों में लंबे समय तक विराम रहने का अपना अनुमान बरकरार रखा है.

महंगाई के मोर्चे पर रिपोर्ट में कहा गया कि जुलाई में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 4.45 प्रतिशत रही, जो बाजार के अनुमानों के अनुरूप थी. वहीं आयातित महंगाई में भी नरमी दर्ज की गई और यह जून 2026 के 8.1 प्रतिशत से घटकर जुलाई में 7.3 प्रतिशत पर आ गई.

हालांकि रिपोर्ट का अनुमान है कि अगस्त में महंगाई बढ़कर करीब 4.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. इसके अलावा अक्टूबर और नवंबर के दौरान यह कुछ समय के लिए 6 प्रतिशत के ऊपर भी जा सकती है. इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही में महंगाई फिर घटकर लगभग 5 प्रतिशत के आसपास आने की संभावना है.

रिपोर्ट में मानसून की स्थिति को भी सकारात्मक बताया गया है. जून में लगभग 40 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज होने के बावजूद जुलाई में अच्छी बारिश और अगस्त में सामान्य वर्षा के कारण देशव्यापी वर्षा घाटा घटकर करीब 13 प्रतिशत रह गया है.

एसबीआई रिसर्च ने कहा कि सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) की स्थिति भी चल रहे अल नीनो प्रभाव के कुछ नकारात्मक असर को कम करने में मदद कर सकती है. इससे कृषि उत्पादन और खाद्य आपूर्ति को समर्थन मिलने की उम्मीद है.

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रमुख खाद्यान्न उत्पादक राज्यों में वर्षा की कमी के बावजूद खरीफ बुआई पिछले वर्ष के स्तर से केवल लगभग 2 प्रतिशत कम है. इससे संकेत मिलता है कि राज्यों में सिंचाई सुविधाओं में सुधार हुआ है, जिससे खेती पर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर सीमित रहा.

विश्लेषकों का मानना है कि इन परिस्थितियों में बाजार को आरबीआई की व्यावहारिक और संतुलित नीति रणनीति को सकारात्मक रूप से देखना चाहिए. केंद्रीय बैंक फिलहाल वृद्धि और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दे सकता है.

वैश्विक स्तर पर भी केंद्रीय बैंकों के सामने नीति संकेतों को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दीर्घकालिक Governmentी बॉन्ड प्रतिफलों को नियंत्रित करने और Governmentी ऋण प्रतिभूतियों की पुनर्खरीद बढ़ाने के कदमों से लॉन्ग टर्म यील्ड में कमी आई है.

डीबीपी

Leave a Comment