
Bengaluru, 1 जून . Political विश्लेषकों और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया के बाद के युग में कर्नाटक के अहिंदा समुदायों का विश्वास जीतना और उसे बरकरार रखना Chief Minister पद के उम्मीदवार और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी Political चुनौतियों में से एक होने की संभावना है.
कांग्रेस विधानसभा पार्टी (सीएलपी) द्वारा शिवकुमार को अपना नेता चुने जाने के बाद यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है, जिससे राज्य में नेतृत्व परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो गया है. इस परिवर्तन की घोषणा करते हुए एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि कांग्रेस 2028 के विधानसभा चुनावों में सत्ता में वापसी करेगी.
हालांकि, Political विश्लेषकों का तर्क है कि पार्टी की चुनावी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या शिवकुमार अहिंदा समुदायों के बीच समर्थन जुटा सकते हैं, जिन्हें कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी का मुख्य समर्थक आधार माना जाता है.
अहिंदा कन्नड़ भाषा का एक Political संक्षिप्त रूप है जिसका अर्थ है अल्पसंख्यातरु (अल्पसंख्यक), हिंदुलिदावरु (पिछड़े वर्ग या अन्य पिछड़ा वर्ग) और दलितरु (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति). यह शब्द अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों के सामाजिक और Political गठबंधन को संदर्भित करता है और पूर्व Chief Minister सिद्धारमैया से जुड़ा एक महत्वपूर्ण Political मंच रहा है.
विश्लेषकों का कहना है कि शिवकुमार, अपनी संगठनात्मक और Political क्षमताओं के बावजूद, अहिंदा समुदायों में सिद्धारमैया के समान प्रभाव हासिल करने में सक्षम नहीं हैं. जाति जनगणना रिपोर्ट और श्रेणी 2बी के तहत मुसलमानों के लिए आरक्षण जैसे प्रमुख मुद्दों पर उनके दृष्टिकोण पर कड़ी नजर रखी जाएगी, खासकर इसलिए क्योंकि ये दोनों मुद्दे लगातार Political बहस और विपक्षी आलोचना का विषय बने हुए हैं.
साथ ही, शिवकुमार के सामने अहिंदा समुदायों और अन्य प्रभावशाली सामाजिक समूहों (वोक्कालिगा और लिंगायत शामिल) के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है, जो कर्नाटक के चुनावी परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
Political पर्यवेक्षकों का कहना है कि सिद्धारमैया ने लगातार खुद को अहिंदा समुदायों के समर्थक के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि वोक्कालिगा और लिंगायत समुदायों के कुछ वर्गों का समर्थन भी बरकरार रखा. इस व्यापक सामाजिक गठबंधन को 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की भारी जीत का श्रेय दिया गया.
2023 में कांग्रेस के पीछे अहिंदा के वोटों के एकजुट होने को अक्सर ‘इंद्रधनुषी गठबंधन’ के रूप में वर्णित किया गया था. पार्टी को अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से मुसलमानों से भारी समर्थन मिला, साथ ही दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासी समुदायों से भी महत्वपूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ.
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एमएस