आदित्य ठाकरे ने महराष्ट्र सीएम को लिखा पत्र, जर्जर इमारतों की मरम्मत के लिए फंड रिलीज करने की मांग

Mumbai , 24 अप्रैल . Mumbai में जर्जर इमारतों की मरम्मत कराने के लिए आदित्य ठाकरे ने Friday को Chief Minister देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है. उन्होंने शहर की 13,500 से अधिक इमारतों की मरम्मत के लिए तत्काल विशेष फंड जारी करने की मांग की है.

ठाकरे ने अपने पत्र में कहा कि शहर में हजारों लोग आज भी जानलेवा हालात में रहने को मजबूर हैं. उन्होंने बताया कि इनमें से कई इमारतें 50 से 80 साल पुरानी हैं और मानसून आने से पहले उनकी मजबूती के लिए तुरंत मरम्मत जरूरी है.

उन्होंने कहा कि Mumbai बिल्डिंग रिपेयर एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड (एमबीआरआरबी) इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जिससे जरूरी मरम्मत कार्य रुके हुए हैं. पत्र में कहा गया है कि फंड की कमी के कारण Mumbai करों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता.

ठाकरे ने राज्य Government से इसे आपात स्थिति मानते हुए विशेष फंड देने की मांग की, ताकि भारी बारिश के दौरान कोई हादसा न हो. उन्होंने यह भी कहा कि इन इमारतों के पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) की प्रक्रिया को तेज किया जाए, क्योंकि कई प्रोजेक्ट वर्षों से Governmentी प्रक्रियाओं में अटके हुए हैं.

हाउसिंग विभाग के अनुसार, Mumbai में ‘सेस्ड’ इमारतों की एक अलग श्रेणी होती है. ये ज्यादातर दक्षिण Mumbai की पुरानी निजी इमारतें हैं, जो 1969 से पहले बनी थीं. इन्हें ‘सेस्ड’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां रहने वाले किरायेदार म्हाडा को ‘रिपेयर सेस’ (टैक्स) देते हैं. इसके बदले इन इमारतों की मरम्मत और देखरेख की जिम्मेदारी म्हाडा की होती है.

इन इमारतों को तीन श्रेणियों- कैटेगरी ए (1940 से पहले बनी, सबसे ज्यादा जोखिम वाली), कैटेगरी बी (1940 से 1950 के बीच बनी) और कैटेगरी सी (1950 से 1969 के बीच बनी) में बांटा गया है.

चूंकि ये इमारतें रेंट कंट्रोल कानून के तहत आती हैं, इसलिए इनका किराया बहुत कम होता है (कभी-कभी 100 से 500 रुपए प्रतिमाह तक). इसकी वजह से मकान मालिक इनकी मरम्मत में दिलचस्पी नहीं दिखाते और म्हाडा द्वारा एकत्र किया जाने वाला “सेस” अक्सर इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी चिनाई की मरम्मत के भारी खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता.

सूत्रों के अनुसार, इनका पुनर्विकास स्थायी समाधान है, लेकिन अक्सर यह मकान मालिक और किरायेदारों के बीच विवाद या छोटे प्लॉट होने के कारण डेवलपर्स के लिए फायदे का सौदा न होने की वजह से अटक जाता है. जब रिपेयर बोर्ड का सालाना बजट खत्म हो जाता है, तब ऐसे विशेष फंड की मांग उठती है, क्योंकि उस समय कई खतरनाक इमारतों की मरम्मत के लिए जरूरी पैसा उपलब्ध नहीं होता, जो Mumbai के मानसून में जोखिम बढ़ा देता है.

एएमटी/वीसी

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