
कोलकाता, 1 जून . पश्चिम बंगाल के Chief Minister सुवेंदु अधिकारी ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से पहले संबंधित परिवारों और निवासियों को पर्याप्त समय दिया जाए. यह जानकारी Monday को नगर निगम के एक अधिकारी ने दी.
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) सूत्रों के अनुसार, Chief Minister ने Saturday को अलीपुर क्षेत्र के बरो-9 के अधिकारियों के साथ एक बैठक की. जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान सीएम सुवेंदु अधिकारी ने केएमसी द्वारा की गई कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया.
केएमसी सूत्रों के अनुसार, Chief Minister ने मुख्य रूप से तिलजाला और टॉपसिया क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के संबंध में नोटिस जारी करने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बारे में प्रश्न उठाए थे.
आरोप है कि निवासियों को घर खाली करने के लिए बहुत कम समय देते हुए नोटिस जारी किए गए, जिसके बाद कोलकाता नगर निगम ने तोड़फोड़ का काम शुरू कर दिया था. इस संदर्भ में केएमसी सूत्रों के अनुसार, भवन विभाग के महानिदेशक उज्ज्वल Government से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है.
इसी बीच, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विध्वंस नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी है. न्यायालय ने कहा कि भले ही कोई निर्माण अवैध हो, उसे ध्वस्त करने से पहले एक विशिष्ट कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है.
अदालत ने कहा कि प्रशासन संबंधित पक्षों को उचित सूचना दिए बिना, विचार प्रस्तुत करने का अवसर दिए बिना और कानूनी रूप से निर्धारित समय दिए बिना एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकता है.
Chief Minister ने बैठक में यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि Government को अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन ऐसी कार्रवाई कानून के अनुसार और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए की जानी चाहिए.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसी स्थितियों से बचा जाना चाहिए, जहां परिवारों को अचानक बेदखल कर दिया जाए या पर्याप्त समय दिए बिना घरों को ध्वस्त कर दिया जाए.
इसके साथ ही, Chief Minister ने चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी परिस्थिति में अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. निर्माण कार्य के प्रारंभिक चरण से ही निगरानी बढ़ाने, नियमित निरीक्षण करने और समय पर नोटिस जारी करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं.
उन्होंने बैठक में स्पष्ट किया कि यह निर्देश केवल भवानी विधानसभा क्षेत्र पर ही नहीं बल्कि पूरे कोलकाता शहर पर लागू होता है.
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एसएके/डीकेपी