
Ahmedabad, 26 जून . आम आदमी पार्टी (आप) ने Friday को पूरे Gujarat में डेडियापाडा के विधायक चैतर वसावा के समर्थन में मार्च निकाले. वसावा को नर्मदा जिले की एक सेशंस कोर्ट ने 2023 के एक मामले में सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई थी. यह मामला वन विभाग के अधिकारियों के साथ कथित मारपीट, Governmentी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और जबरन वसूली से जुड़ा था.
हालिया प्रदर्शन, 24 जून को आप की ओर से घोषित राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा था.
Gujarat यूनिट के इंचार्ज गोपाल राय ने कहा था कि पार्टी तीन चरणों वाले आंदोलन के तहत 26 जून को हर जिले में ‘सपोर्ट मार्च’ (पैदल मार्च) निकालेगी और उसके बाद 28 जून को सभी विधानसभा क्षेत्रों में मार्च करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले में सभी उपलब्ध कानूनी रास्ते अपनाएगी.
दिल्ली के पूर्व Chief Minister और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पहले वसावा का समर्थन करते हुए आरोप लगाया था कि उन पर लगे आरोप झूठे और Political मकसद से प्रेरित थे.
पार्टी का दावा था कि आदिवासी समुदाय के लिए आवाज उठाने वाले वसावा को एक साजिश के तहत जेल भेजा गया था.
Friday को राज्य के कई हिस्सों में मार्च निकाले गए. जूनागढ़ में इस जुलूस का नेतृत्व विधायक गोपाल इटालिया और राज्य संगठन सचिव राजू बोरखतरिया ने किया. सूरत में प्रदेश उपाध्यक्ष रामभाई धड़ुक, प्रदेश संगठन सचिव धर्मेश भंडेरी और सूरत Lok Sabha प्रभारी रजनीकांत वाघानी ने मार्च का नेतृत्व किया.
इसी तरह, Ahmedabad में कार्यक्रम में राज्य उपाध्यक्ष गौरीबेन देसाई, राज्य संगठन सचिव डॉ करण बारोट, राज्य छात्र विंग के अध्यक्ष धार्मिक मथुकिया, राज्य मालधारी सेल के अध्यक्ष किरण देसाई और अन्य पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए.
बारडोली, साबरकांठा और दूसरे इलाकों में भी ऐसे ही मार्च निकाले गए.
ये प्रदर्शन राजपीपला सेशन कोर्ट के फैसले के बाद हुए, जिसमें एडिशनल सेशन जज एवी हिरपारा ने वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा और सात अन्य को 30 अक्टूबर 2023 को हुई एक घटना के लिए दोषी ठहराया था.
प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, फॉरेस्ट अधिकारियों ने डेडियापाड़ा में स्थानीय लोगों द्वारा खेती की जा रही Governmentी फॉरेस्ट जमीन से कथित कब्जे हटा दिए थे.
बाद में विवाद पर चर्चा के लिए बुलाई गई एक बैठक के दौरान अधिकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें धमकाया गया.
अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि वसावा ने अधिकारियों को डराने-धमकाने के लिए बिना लाइसेंस वाली पिस्तौल से गोली चलाई. सभी नौ दोषियों को सात साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई और प्रत्येक पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया.
फैसले के बाद, वसावा ने संकेत दिया कि वह इस सजा को Gujarat उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे. इस सजा के कारण Gujarat विधानसभा में वसावा की सदस्यता पर भी सवाल उठने लगे हैं.
उप-स्पीकर पूर्णेश मोदी ने कहा कि ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ के प्रावधानों के तहत सजा मिलने के बाद विधायक सदन के सदस्य नहीं रहे. हालांकि, किसी उच्च न्यायालय द्वारा अपील के नतीजे या स्टे (रोक) से यह मामला प्रभावित हो सकता है.
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पीएसके