8वें वेतन आयोग की चंडीगढ़ में शुरू हुईं बैठकें, वेतन और पेंशन पर होंगे विचार-विमर्श

New Delhi, 16 सितंबर . 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने वेतन और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर परामर्श प्रक्रिया के तहत Wednesday से चंडीगढ़ में तीन दिवसीय दौरा शुरू किया है.

आयोग Friday तक विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगी समूहों और क्षेत्रीय प्रशासन के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें करेगा. इन बैठकों में मुख्य रूप से वेतन संरचना, सेवा शर्तों और पेंशन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है.

8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्षता Supreme Court की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग में सदस्य सचिव के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन और सदस्य के रूप में वित्त विशेषज्ञ तथा Prime Minister की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य पुलक घोष शामिल हैं.

बैठकों में पंजाब, Haryana, Himachal Pradesh और चंडीगढ़ के प्रतिनिधि वेतन और पेंशन संशोधन से संबंधित अपने सुझाव आयोग के समक्ष रखेंगे.

इसके अलावा, कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों तथा रेलवे और रक्षा कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन्न समूह भी आयोग के सामने अपनी मांगें और सुझाव प्रस्तुत करेंगे.

इन परामर्श बैठकों से प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं को आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करते समय ध्यान में रखेगा.

आयोग की सिफारिशों का प्रभाव एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है. इनमें लगभग 50 लाख केंद्रीय Governmentी कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं. इस दायरे में रक्षा और रेलवे कर्मी तथा सेवानिवृत्त कर्मचारी भी आते हैं.

कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग की है. फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से नए वेतनमान के तहत मूल वेतन में बढ़ोतरी हो सकती है.

इसके साथ ही कर्मचारी संगठन महंगाई भत्ता (डीए) व्यवस्था में भी बदलाव चाहते हैं. उनकी मांग है कि डीए की समीक्षा अधिक बार की जाए और एक निश्चित सीमा तक पहुंचने पर उसे मूल वेतन में शामिल किया जाए.

कई संगठनों ने हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), परिवहन भत्ता और कठिन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले विशेष भत्तों की भी समीक्षा की मांग की है. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई और बड़े शहरों में जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखते हुए इन भत्तों में वृद्धि की जानी चाहिए.

पेंशनभोगी संगठनों ने सेवानिवृत्ति के बाद आय की सुरक्षा को मजबूत बनाने, पारिवारिक पेंशन में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई है.

वहीं, कर्मचारी संगठनों ने पदोन्नति व्यवस्था, सेवा शर्तों और Governmentी वेतन को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने से जुड़े मुद्दों को भी आयोग के सामने उठाया है. उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और नई भर्ती में भी मदद मिलेगी.

आयोग को उसके कार्यक्षेत्र (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) के अनुसार 3 नवंबर 2025 को गठन के बाद 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र Government को सौंपनी हैं.

चंडीगढ़ में शुरू हुई यह बैठक श्रृंखला आयोग की परामर्श प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है, क्योंकि इसके निष्कर्ष भविष्य में लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन एवं पेंशन ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं.

एएमटी/डीकेपी

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