
Lucknow, 10 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर करने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने Saturday को कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया. प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने भर्ती का परिणाम संशोधित कर उन्हें न्याय देने की मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान ‘निषाद चाचा बाहर आओ’ के नारे लगाए गए. अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद मंत्री ने उनकी मांगों को Chief Minister और Government के समक्ष उठाने तथा उचित स्तर पर चर्चा कर समाधान का प्रयास करने का आश्वासन दिया. इसके बाद प्रदर्शन समाप्त हो गया.
अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण की विसंगतियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है. उन्होंने संबंधित विसंगतियों को दूर कर भर्ती का परिणाम संशोधित करने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान मौके पर Police बल तैनात रहा. बाद में मंत्री संजय निषाद ने प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. मीडिया से बातचीत में संजय निषाद ने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में अभ्यर्थियों के साथ नाइंसाफी होने की बात कही गई है.
उन्होंने कहा, “इंसाफ मांगना हर आदमी का हक है और हम लोगों ने इंसाफ दिलाने का संकल्प लिया है.” उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले पर Chief Minister , Government और कैबिनेट के स्तर पर चर्चा की जाएगी. संबंधित अधिकारियों से भी बात कर विसंगतियों को दूर करने का प्रयास होगा, ताकि अभ्यर्थियों को उनका वाजिब हक मिल सके. मंत्री ने कहा कि वह शोषितों, वंचितों, पिछड़ों और दलितों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने अभ्यर्थियों की मांग को न्याय और अधिकार से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की विसंगति के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है, तो उस पर भी चर्चा की जाएगी.
आंदोलन के औचित्य पर पूछे गए सवाल के जवाब में संजय निषाद ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी मांग उठाने और आंदोलन करने का अधिकार है. उन्होंने कहा, “नहीं मांगेंगे, नहीं आंदोलन करेंगे तो कोई सुनने वाला थोड़ी है. आंदोलन से ही देश आजाद हुआ, आंदोलन से ही हक मिलता है.” उन्होंने आरक्षण को संवैधानिक व्यवस्था और सामाजिक न्याय से जुड़ा अधिकार बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पिछड़े, शोषित और वंचित वर्गों को अवसर उपलब्ध कराना तथा उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाना है.”
उन्होंने कहा कि समाज के निचले पायदान पर खड़े लोगों को आगे बढ़ने के अवसर देना सामाजिक न्याय की मूल भावना है. 68,500 और 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी कथित अनियमितताओं को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने आरोपों को सीधे तौर पर घोटाला कहने से परहेज किया. उन्होंने कहा कि किसी मामले को घोटाला कहने से पहले उसकी जांच जरूरी है. उन्होंने कहा, “जांच में जब आ जाए कि यह गलत हुआ है, तब उसको हम दूसरा शब्द दे सकते हैं. लेकिन तब तक कहते हैं कि त्रुटियां होती हैं, बहुत ऐसे होते हैं विसंगतियां होती हैं.
संजय निषाद ने कहा कि 68,500 भर्ती के अभ्यर्थी अधिकारियों की कथित विसंगतियों के शिकार हैं और इन्हें दूर किया जाना चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को उनका हक मिल सके. इस दौरान टीजीटी-पीजीटी भर्ती में पूर्व सैनिकों को मिलने वाले क्षैतिज आरक्षण का मुद्दा भी उठाया गया. इस पर मंत्री ने कहा कि यह विषय उनके संज्ञान में आया है और इस पर आगे चर्चा की जाएगी. मंत्री के आश्वासन के बाद अभ्यर्थियों ने अपना धरना समाप्त कर दिया. अब उनकी निगाहें Government और Chief Minister के स्तर पर होने वाली संभावित चर्चा तथा आरक्षण संबंधी विसंगतियों के समाधान पर टिकी हैं.
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विकेटी/पीएम