
New Delhi, 10 अक्टूबर . केंद्र Government ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि हैदाराबाद से जुड़ी प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को लेकर वर्तमान में अध्ययन चल रहा है और राज्य Government को जमीन अधिग्रहण से जुड़ी कोई मांग नहीं भेजी गई है.
हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-Bengaluru और हैदराबाद-पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चर्चा के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से राष्ट्रीय राजधानी में मुलाकात के बाद, केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बताया कि रेल मंत्री ने स्पष्ट किया है कि संबंधित राज्य Governmentों को जमीन अधिग्रहण का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है.
रेड्डी ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “रेल मंत्री ने साफ किया है कि संबंधित राज्य Governmentों को जमीन अधिग्रहण का कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है और इस चरण में हाई-स्पीड रेल के नाम पर जमीन का कोई भी अधिग्रहण गैर-कानूनी है.”
उन्होंने कहा कि तीनों कॉरिडोर के लिए अलाइनमेंट स्टडी अभी चल रही है और अलाइनमेंट तय हो जाने के बाद, संबंधित राज्य Governmentों और किसानों के साथ जानकारी साझा की जाएगी.
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय पर आया है जब तेलंगाना Government रेल कॉरिडोर और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन अधिग्रहण की कोशिश कर रही है, जिसका हैदराबाद के बाहरी इलाकों में किसान विरोध कर रहे हैं.
इसके अलावा, साउथ सेंट्रल रेलवे ने पहले social media प्लेटफॉर्म पर यही वीडियो पोस्ट किया था. इसमें कहा गया था कि वैष्णव ने रेड्डी के साथ हैदराबाद को चेन्नई, Bengaluru और पुणे से जोड़ने वाली हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी के प्रस्तावित रूट के बारे में विस्तार से चर्चा की.
इससे पहले अगस्त में, Government ने बताया था कि भारतीय रेलवे ने जुलाई तक 1.14 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कैपिटल खर्च किया है, जो 2026-27 के लिए बजट में तय रकम का लगभग 39 प्रतिशत है.
Lok Sabha में एक लिखित जवाब में, वैष्णव ने बताया कि केंद्र Government ने चालू वित्त वर्ष के लिए तय 2,93,030 करोड़ रुपए के बजट में से 1,14,973 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. मंत्री ने कहा कि सुरक्षा से जुड़े कामों पर खर्च लगातार बढ़ा है, यह 2013-14 में 39,200 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 1,20,389 करोड़ रुपए हो गया है.
स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) सिस्टम ‘कवच’ के बारे में मंत्री ने बताया कि 31 जुलाई तक 2,633 रूट किलोमीटर पर इसका वर्शन 4.0 लागू किया जा चुका है. इसमें दिल्ली-Mumbai और दिल्ली-हावड़ा जैसे ज्यादा ट्रैफिक वाले कॉरिडोर के अहम हिस्से शामिल हैं.
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एबीएस