
New Delhi, 22 अगस्त . ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार- 2026’ के लिए देश भर से 48 शिक्षकों को चुना गया है. देश की President द्रौपदी मुर्मु नामित सभी 48 शिक्षकों को 5 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ के मौके पर New Delhi के विज्ञान भवन में सम्मानित करेंगी. कुछ शिक्षकों ने से खास बातचीत की और इस सम्मान के लिए आभार जताया.
Madhya Pradesh की शिक्षिका अर्चना शुक्ला ने से कहा, “स्टूडेंट्स पिछड़े बैकग्राउंड से आते हैं और उनमें से कई आर्थिक रूप से स्थिर नहीं हैं. हालांकि, इन बच्चों में बहुत क्षमता है. हमें लगता है कि अगर हम अपने पढ़ाने के तरीकों में कुछ बदलाव करें, तो इससे इन बच्चों में काफी सुधार आ सकता है.”
अर्चना शुक्ला ने आगे कहा, “मैं सच में भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं. यह सब भगवान की कृपा से है और मेरे स्टूडेंट्स की वजह से भी. Friday शाम, करीब 5:00-5:30 बजे, मुझे एक फोन आया, जिसमें कहा गया, ‘मैडम, प्लीज अपना ईमेल चेक करें.’ मैंने अपना ईमेल चेक किया तो अवॉर्ड के बारे में पता चला. आज मुझे जो अवॉर्ड मिल रहा है, वह किसी एक इंसान के लिए नहीं है. यह सभी महिलाओं के लिए है, Madhya Pradesh के शिक्षकों के लिए और मेरे स्टूडेंट्स के लिए है, जिन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा किया है.”
प्रभारी प्राचार्य पी. विजय कुमार ने कहा, “मुझे Friday शाम को 6 बजे यह खबर प्राप्त हुई. टीचर अर्चना शुक्ला ने फोन पर मुझे जानकारी दी. यह पूरे स्कूल के लिए, बच्चों के लिए बहुत सौभाग्य की बात है. इन्हें अपने कार्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार दिया जा रहा है. खासतौर से, शिक्षा के तरीकों में जो इनोवेटिव प्रैक्टिस अपनाया है, प्रोजेक्ट बेस लर्निंग, इसी इनोवेशन के कारण बच्चों में विज्ञान के प्रति आकर्षण पैदा हुआ है. हमने कोशिश की है कि सिर्फ विज्ञान ही नहीं, कॉमर्स और ऑर्ट्स के क्षेत्र में भी बच्चे रिसर्च का काम कर सकें.”
वहीं, पंजाब के डॉ. दिनेश कुमार ने कहा, “मुझे बहुत खुशी है. बच्चों ने बहुत अच्छा किया और ज्यूरी ने मेरे काम को पहचाना. जिला, राज्य और देश से मुझे फोन आए, सभी ने मुझे शुभकामनाएं दी. स्कूल में भी काफी खुशी का माहौल है. बच्चे जब हमें कुछ करते हुए देखते हैं, तो जल्दी सीखते हैं. ये Governmentी स्कूल के बच्चे हैं, बहुत ही गरीब परिवार से आते हैं, और कई सारे बच्चों को एनजीओ वगैरह ने गोद लिया है. वो जब आगे किसी इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेज जाते हैं, तो उनकी फीस यही एनजीओ और संस्था भरती है.”
गाजियाबाद की विज्ञान की शिक्षिका डॉ. रेणु त्रिपाठी ने कहा, “Friday शाम 5.56 मेरे पास एक मेल आया. मैं उस अनुभूति को शब्दों में बयां नहीं कर पा रही हूं. जिसका मुझे इंतजार था, जो मेरी योग्यता है, बच्चों को जो मैं पढ़ा रही हूं और वो सीख रहे हैं, ऊंचे पदों पर जा रहे हैं, उसका मुझे आज सौभाग्य मिला. विज्ञान में नवाचार मुख्य होता है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2022 के तहत जो पढ़ाया जा रहा है, उसमें ये मुख्य है कि हम बच्चों को कैसे आसान से आसान भाषा में पढ़ाएं. बच्चे प्रैक्टिकल और कम लागत वाले मॉडल के जरिए सबसे ज्यादा शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं. हमारे यहां हर्बल गॉर्डन है, मैं बच्चों को वहां ले जाकर सिखाती हूं. बच्चे कुछ करके सीखते हैं और इसी से प्रेरणा मिली. मेरी प्रेरणा यही थी कि मैं अपनी शिक्षा बच्चों तक पहुंचाऊं.”
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केके/एबीएम