
मैसूर, 11 अक्टूबर . कर्नाटक के प्रसिद्ध 11 दिवसीय नाडा हब्बा (राज्य उत्सव) मैसूर दशहरा के ऐतिहासिक 417वें संस्करण का Sunday को शुभारंभ हुआ. कोप्पल स्थित गविसिद्धेश्वर मठ के अभिनव गविसिद्धेश्वर स्वामीजी ने चामुंडी पहाड़ियों पर पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ समारोह का उद्घाटन किया. इसके साथ ही राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और शाही गौरव को प्रदर्शित करने वाले भव्य वार्षिक उत्सव की शुरुआत हो गई.
स्वामीजी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुभ धनुर लग्न में मां चामुंडेश्वरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उत्सव की शुरुआत की. इस मौके पर Chief Minister डीके शिवकुमार, उनकी पत्नी उषा, मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
सभा को संबोधित करते हुए Chief Minister डीके शिवकुमार ने कहा कि मैसूर दशहरा शक्ति, ज्ञान, संस्कृति और समानता का संगम है. उन्होंने कहा कि शक्ति उपलब्धि दिलाती है, ज्ञान विकास लाता है, संस्कृति समानता को बढ़ावा देती है और समानता शांति का मार्ग प्रशस्त करती है.
उन्होंने कहा, “दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं है. यह कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान, सौहार्द और आत्मसम्मान का प्रतीक है.” उन्होंने कहा कि अगले 11 दिनों तक देशभर के लोगों को मैसूर के माध्यम से India की संस्कृति और विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा.
Chief Minister ने कहा कि दशहरा एक शाही उत्सव से विकसित होकर जनता का उत्सव बन गया है. यह राजतंत्र से लोकतंत्र तक की यात्रा को दर्शाता है. उन्होंने बताया कि विजयनगर साम्राज्य के शासकों द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को मैसूर के वाडियार राजाओं ने आगे बढ़ाया और इसे कला एवं संस्कृति के संरक्षण और प्रचार का मंच बनाया.
सीएम ने कहा, “अज्ञानता के कांटे को ज्ञान के कांटे से निकालना शिक्षा है, जबकि अधर्म के कांटे को धर्म के कांटे से निकालना दशहरा है. मंदिर में भगवान को देखना भक्ति है, लेकिन इंसानों में भगवान को देखना मानवता है.”
दशहरा से जुड़ी ऐतिहासिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विजयनगर के शासक दशहरा के दौरान भैंसों को लाने की परंपरा निभाते थे. इस वर्ष उसी सांस्कृतिक याद को पारंपरिक भैंसा दौड़ कंबाला के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है, भले ही इसकी आलोचना भी हुई हो.
उन्होंने कहा कि दशहरा कर्नाटक की पारंपरिक कला विधाओं जैसे डोल्लू कुनिता, तमाटे, नगारी, वीरगासे, कोलाटा और यक्षगान के लिए एक बड़ा मंच बन चुका है. इस उत्सव के जरिए हजारों रंगकर्मी, गायक और संगीतकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं.
Chief Minister ने कहा, “दशहरा बच्चों के लिए रंगों का त्योहार, कलाकारों के लिए मंच, व्यापारियों के लिए अवसर और पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव है.”
उन्होंने ‘ब्रांड मैसूर’ को विकसित करने में नलवाडी कृष्णराज वाडियार के योगदान का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि मैसूर सिल्क, मैसूर सैंडल सोप, मैसूर पेंटिंग, मैसूर पाक और कन्नंबाड़ी बांध ने शहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
डीके शिवकुमार ने कहा कि मैसूर की सांस्कृतिक पहचान को कई पीढ़ियों के शासकों, कलाकारों, शिल्पकारों, संगीतकारों, शिक्षकों और व्यापारियों ने मिलकर बनाया है. उन्होंने कहा कि शहर की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसके महल नहीं, बल्कि लोगों का उसके नाम से जुड़ा विश्वास और स्नेह है. Chief Minister ने कहा कि राज्य Government अपनी गारंटी योजनाओं के माध्यम से सामाजिक समानता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने गृह लक्ष्मी योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को 2,000 रुपए की सहायता राशि देने की योजना को मां चामुंडेश्वरी के चरणों में समर्पित किए जाने के 1,139 दिन पूरे हो चुके हैं.
उन्होंने कहा कि Government लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से कल्याणकारी योजनाओं को लगातार लागू कर रही है. अभिनव गविसिद्धेश्वर स्वामीजी की प्रशंसा करते हुए Chief Minister ने कहा कि उनकी समाजसेवा पूरे देश के लिए एक आदर्श है और गविसिद्धेश्वर मठ सभी समुदायों में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने वाला संस्थान है.
उन्होंने कहा, “स्वामीजी केवल एक मठ के प्रमुख नहीं, बल्कि जनसामान्य के स्वामीजी हैं.” उन्होंने समाज कल्याण और सामुदायिक विकास में मठ के योगदान की सराहना की.
Chief Minister ने स्वामीजी के जल संरक्षण अभियान का भी जिक्र किया और कहा कि राज्य में जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए जलदीक्षा का संदेश आज बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा, “पानी की बर्बादी भविष्य की पीढ़ियों के जीवन-रक्त को बहाने के समान है.” साथ ही राज्यभर के लोगों से जल संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की.
शिवकुमार ने शिक्षा, समाज सेवा और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में धार्मिक संस्थाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि वे धार्मिक नेताओं का सम्मान करते हैं और समाज में उनके योगदान को महत्त्व देते हैं. उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनकी अपील स्वीकार करते हुए दशहरा समारोह में तीनों सेनाओं के दलों की भागीदारी सुनिश्चित की.
कवि कुवेंपु के विश्वमानवता के दर्शन का उल्लेख करते हुए Chief Minister ने कहा कि मानवता को धर्म और सामाजिक विभाजनों से ऊपर उठकर विश्व शांति का आधार बनना चाहिए.
इससे पहले शिवकुमार ने कुप्पन्ना पार्क स्थित ग्लास हाउस में संविधान की प्रतिकृति को पुष्पांजलि अर्पित कर दशहरा फल एवं पुष्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. उन्होंने विधान सौधा की पुष्प सज्जा भी देखी.
इस कार्यक्रम में मंत्री रामलिंगा रेड्डी, ईश्वर खंड्रे, यतिंद्र सिद्धारमैया, पुट्टरंगा शेट्टी, सांसद सुनील बोस, विधायक, विधान परिषद सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न बोर्डों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
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एएमटी/वीसी