
New Delhi, 13 सितंबर . New Delhi में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सफल समापन हो गया. सबसे बड़ी उपलब्धि संयुक्त बयान को मिली मंजूरी रही. New Delhi घोषणापत्र में संकेत भी थे और संदेश भी. दुनिया ने भारतीय कूटनीतिक का इकबाल बुलंद होते हुए देखा. Prime Minister Narendra Modi ने तीन दिनों में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के साथ 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की. इन बैठकों के अलावा उन्होंने कई वैश्विक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों के साथ अलग से मुलाकात और अनौपचारिक बातचीत का सिलसिला भी चला.
Prime Minister की इन बैठकों ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को केवल बहुपक्षीय विचार-विमर्श का मंच भर नहीं रहने दिया, बल्कि India के लिए एक साथ कई देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर भी बना डाला. रूस, ईरान, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, मलेशिया, वियतनाम, कजाकिस्तान, फिलीपींस, यूएई और अफ्रीकी देशों के नेताओं के साथ हुई बातचीत में India के रणनीतिक, आर्थिक, ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय हितों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे.
Prime Minister मोदी की 11 सितंबर को रूसी President व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक से इस कूटनीतिक सिलसिले की शुरुआत हुई. रूस के साथ India की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और ऊर्जा संबंधों के बीच यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर वैश्विक भू-Political समीकरण लगातार बदल रहे हैं.
इसी दिन मोदी ने ईरान के President मसूद पेजेश्कियन से भी मुलाकात की. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच ईरान के साथ India के संबंधों का महत्व और बढ़ गया है. चाबहार बंदरगाह, मध्य एशिया तक संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता India के लिए ईरान को महत्वपूर्ण साझेदार बनाते हैं.
Prime Minister ने इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की. वैश्विक दक्षिण, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दे India की ब्रिक्स अध्यक्षता के प्रमुख एजेंडे में रहे हैं.
12 सितंबर को Prime Minister मोदी की द्विपक्षीय बैठकों का सिलसिला और तेज हुआ. उन्होंने इथियोपिया के Prime Minister अबी अहमद अली, मलेशिया के Prime Minister अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और वियतनाम के Prime Minister ले मिन्ह हंग के साथ अलग-अलग बैठकें कीं.
इन मुलाकातों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग, ऊर्जा, निवेश, व्यापार, दुर्लभ खनिज, अंतरिक्ष और संपर्क जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई. India के लिए खाड़ी क्षेत्र के साथ संबंधों के लिहाज से यूएई के नेतृत्व के साथ बातचीत भी महत्वपूर्ण रही. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच India ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंधों के साथ-साथ यूएई और अन्य अरब खाड़ी देशों के साथ अपनी मजबूत रणनीतिक एवं आर्थिक साझेदारी को भी बनाए रखना चाहता है.
हालांकि, 12 सितंबर की सबसे ज्यादा चर्चित बैठक Prime Minister मोदी और चीन के President शी जिनपिंग के बीच हुई. गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में आए तनाव के बीच दोनों देशों ने हाल के समय में संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम उठाए हैं. ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी-शी मुलाकात को दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया के लिहाज से अहम माना गया.
चीन ब्रिक्स का एक प्रमुख सदस्य और India का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है. हालांकि सीमा, व्यापार और रणनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी कायम हैं, लेकिन उच्चस्तरीय संवाद संबंधों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
इसी बीच President द्रौपदी मुर्मु ने भी ईरानी President मसूद पेजेश्कियन से मुलाकात की. Prime Minister मोदी के साथ पेजेशकियान की बैठक के एक दिन बाद हुई यह मुलाकात India और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क की निरंतरता को दर्शाती है.
13 सितंबर को Prime Minister मोदी की द्विपक्षीय कूटनीति का सिलसिला जारी रहा. एक दो नहीं इस दिन भी करीब 7 द्विपक्षीय मुलाकात की. उन्होंने कजाकिस्तान के President कसीम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के President फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर, मिस्र के President अब्देल फतह अल-सिसी और दक्षिण अफ्रीका के President सिरिल रामफोसा के साथ बैठकें कीं.
इसके बाद मोदी ने बुरुंडी के President एवरेस्ट नदाइशिमिये, नाइजीरिया के उपPresident काशिम शेट्टीमा और युगांडा की उपPresident जेसिका अलुपो के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की.
इस तरह तीन दिनों में Prime Minister की 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें India की सक्रिय कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती हैं. महत्वपूर्ण बात यह है कि यह संपर्क केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं रहा. ब्रिक्स के दौरान Prime Minister ने कई अन्य राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नेताओं के साथ ‘पुल-असाइड’ यानी अलग से छोटी मुलाकातें भी कीं.
ब्रिक्स के इस सम्मेलन में India ने जहां बहुपक्षीय सहयोग, वैश्विक दक्षिण की आवाज, संयुक्त राष्ट्र सुधार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया, वहीं Prime Minister मोदी की लगातार द्विपक्षीय बैठकों ने India को अलग-अलग देशों के साथ अपने विशिष्ट हितों पर सीधे बातचीत करने का अवसर दिया.
रूस, ईरान और चीन के साथ बैठकों ने जहां India की रणनीतिक स्वायत्तता और बदलते भू-Political समीकरणों के बीच संतुलन की तस्वीर पेश की, वहीं अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य एशिया और खाड़ी देशों के नेताओं के साथ बातचीत ने India की व्यापक वैश्विक साझेदारी को रेखांकित किया.