2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी, अगला लक्ष्य 10 हजार इंजनः राजनाथ सिंह

New Delhi, 6 अक्टूबर . हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने Tuesday को India की एयरो-इंजन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में एचएएल कोरापुट द्वारा निर्मित 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी की गई. इसी अवसर पर हेलीकॉप्टर में लगने वाले शक्ति इंजन की दूसरी निर्माण लाइन का भी उद्घाटन किया गया.

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एचएएल के लिए एक संख्या या मील का पत्थर नहीं है, बल्कि India की एयरोस्पेस यात्रा और सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता में 2,000 महत्वपूर्ण योगदान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि इन इंजनों के पीछे कई पीढ़ियों के इंजीनियरों, तकनीशियनों, पर्यवेक्षकों, वैज्ञानिकों और कुशल कामगारों की प्रतिबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा है. वर्ष 1964 में स्थापना के बाद से एचएएल कोरापुट India की एयरो-इंजन क्षमता के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है. यहां निर्मित और रखरखाव किए गए इंजनों ने मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को शक्ति दी है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि 2,000वें इंजन की उपलब्धि इसी लंबी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है. उन्होंने एचएएल कोरापुट के इंजीनियरों, तकनीशियनों और पूरी टीम को उनके समर्पण और तकनीकी दक्षता के लिए बधाई दी. वहीं, कोरापुट में शक्ति इंजन के लिए दूसरी उत्पादन लाइन भी स्थापित की गई है. इस पर 218 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है. इससे देश में शक्ति इंजन के उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी. यह अतिरिक्त क्षमता उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी.

राजनाथ सिंह ने कहा कि कलपुर्जों के स्वदेशीकरण से लेकर इंजन तैयार करने में लगने वाले समय में कमी तक, एचएएल की ओर से किए जा रहे प्रयास सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी को मजबूत कर रहे हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि 2,000वें इंजन की डिलीवरी को केवल एक उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने इसे भविष्य के बड़े लक्ष्य की शुरुआत बताया. उन्होंने कहा, “आज के 2,000वें इंजन की डिलीवरी को हम केवल एक मील का पत्थर न लें, बल्कि अगले 10 हजार, अगले 1 लाख और एक ऐसी भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के निर्माण के संकल्प के रूप में लें, जो दुनिया की सबसे उन्नत प्रणोदन प्रणालियों को डिजाइन, विकसित, निर्मित और उनका समर्थन करने में सक्षम हो.”

उन्होंने कहा कि एयरो-इंजन पर महारत हासिल करना आधुनिक उद्योग की सबसे उन्नत तकनीकों में महारत हासिल करने के बराबर है. दुनिया में कुछ ही देश इस क्षमता को हासिल कर पाए हैं और India उनमें शामिल है. राजनाथ सिंह ने कहा कि लगभग 5,000 करोड़ रुपए के निवेश की दिशा में किए जा रहे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के स्वदेशीकरण की दिशा में मिश्र धातु निगम लिमिटेड के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि एयरो-इंजन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल इंजन तैयार करने तक सीमित नहीं है. इसके लिए आवश्यक कच्चे माल और कलपुर्जों की आपूर्ति में भी देश को अपनी क्षमता मजबूत करनी होगी.

रक्षा मंत्री ने सुखोई-30 एमकेआई के लिए एएल-31एफपी इंजन के उत्पादन में एचएएल कोरापुट की टीम के प्रदर्शन की भी सराहना की. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में India Government ने एचएएल को 240 एएल-31एफपी इंजनों का आदेश दिया था. वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और कच्चे माल से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद पहला इंजन निर्धारित समय से पहले तैयार कर दिया गया.

राजनाथ सिंह के अनुसार, दूसरे वर्ष के अंत तक 60 इंजनों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 63 इंजन वितरित किए जा चुके हैं. एएल-31एफपी इंजन के उत्पादन को और गति देने के लिए एचएएल अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता को 30 से बढ़ाकर 50 इंजन करने जा रहा है. इसके लिए 335 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है.

रक्षा मंत्री ने कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के ये प्रयास ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं, जब देश की सशस्त्र सेनाओं के लिए स्वदेशी रक्षा उत्पादन और समय पर आपूर्ति पर विशेष जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 2,000वें इंजन की उपलब्धि अतीत की सफलता का उत्सव भर नहीं है, बल्कि India को दुनिया की अग्रणी एयरोस्पेस और प्रणोदन तकनीक वाले देशों की कतार में और मजबूती से खड़ा करने के अगले संकल्प की शुरुआत है.

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जीसीबी/डीकेपी

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