गुजरात में 11 नए विकासशील तालुकों की घोषणा, प्रत्येक को सालाना 3 करोड़ रुपए का मिलेगा अनुदान

Ahmedabad, 11 दिसंबर . Gujarat के Chief Minister भूपेंद्र पटेल ने राज्य के संतुलित क्षेत्रीय विकास को मजबूती देने के लिए 11 अन्य तालुकों को विकासशील तालुका की सूची में शामिल करने की मंजूरी दी है. इससे इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, सामाजिक विकास और प्रशासनिक क्षमता को बढ़ावा मिलेगा.

विकासशील तालुका योजना के तहत इन तालुकों को विकास कार्यों के लिए सालाना 2 करोड़ रुपए का बजट मिलेगा. इसके अतिरिक्त, ‘आपनो तालुको वाइब्रेंट तालुको (एटीवीटी)’ पहल के तहत 1 करोड़ रुपए और उपलब्ध कराए जाएंगे. यानी, प्रत्येक तालुका को कुल 3 करोड़ रुपए का वार्षिक अनुदान मिलेगा.

नए विकासशील तालुकों में कड़वल (छोटा उदेपुर), उकाई (तापी), गोविंद गुरु लिमड़ी (दाहोद), सुखसर (दाहोद), चिकड़ा (नर्मदा), रा (वाव-थराड), धरणिधर (वाव-थराड), ओगड़ (बनासकांठा), हदाद (बनासकांठा), गोधर (महिसागर) और नानापोंधा (वलसाड) शामिल हैं.

Gujarat Government तालुकों का चयन मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) के 44 सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के आधार पर करती है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के सभी क्षेत्र (चाहे पुराने हों या नए) दीर्घकालिक और लघुकालिक योजनाओं से लाभान्वित हों और समग्र विकास की गति तेज हो.

हाल के वर्षों में, प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाने और क्षेत्रीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 17 नए तालुके बनाए गए हैं. इनमें से जिन तालुकों के आधे से ज्यादा गांव पहले से विकासशील तालुकों में शामिल थे, उन्हें अब स्वयं विकासशील तालुका घोषित किया गया है.

Governmentी अधिकारियों का कहना है कि Chief Minister के इस निर्णय से इन क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा. इससे स्थानीय प्रशासन और शासन क्षमता मजबूत होगी और सभी Gujarat के समावेशी विकास में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगे.

Gujarat देश के सबसे विकसित और औद्योगिक रूप से सक्रिय राज्यों में से एक है. यह रसायन, दवा, वस्त्र, ऑटोमोबाइल, अक्षय ऊर्जा और बंदरगाह जैसे क्षेत्रों में अग्रणी है. राज्य में मजबूत औद्योगिक क्लस्टर, बेहतर लॉजिस्टिक्स और व्यवसाय-मित्र शासन मॉडल निवेशकों के लिए आकर्षक हैं.

राज्य में सड़क नेटवर्क, बिजली आपूर्ति, बंदरगाह, स्वच्छता, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सामाजिक और भौतिक अवसंरचना में भी लगातार सुधार हो रहा है.

वीकेयू/एबीएम

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