
New Delhi, 30 सितंबर . जब-जब कार्तिक का महीना आएगा, घाटों पर जब-जब सुपली में ठेकुआ सजेगा, तब-तब एक आवाज हवा में गूंजेगी ‘केलवा के पात पर उगेलन सूरजमल झुके झुके’. ये आवाज थी बिहार की बेटी, स्वर कोकिला शारदा सिन्हा की. 1 अक्टूबर 1952 में बिहार के सुपौल जिले के एक छोटे से गांव हुलास में सुखदेव ठाकुर के घर एक बेटी का जन्म हुआ था, जिसने आगे चलकर बिहार की पहचान को सात समंदर पार तक पहुंचा दिया.
शारदा सिन्हा का बचपन बेहद साधारण था. गांव के ही पंडित रामचन्द्र झा से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शुरुआती तालीम ली. ससुराल बेगूसराय के सिहमा गांव में होने के बाद भी उन्होंने संगीत नहीं छोड़ा. समस्तीपुर के एक कॉलेज में संगीत की शिक्षिका बनीं और फिर धीरे-धीरे लोकगीतों को नया जीवन देने लगीं.
1974 में उन्होंने पहला भोजपुरी गीत गाया, लेकिन असली पहचान 1978 में आई जब उनका छठ गीत आया. उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. मैथिली, भोजपुरी, मगही, बज्जिका, और हर भाषा में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी.
बिहार में कहा जाता है – दो चीजों के बिना छठ नहीं हो सकता, एक सूरज देव और दूसरी शारदा सिन्हा की आवाज. उनके गीत सिर्फ गीत नहीं, व्रत की भावना थे. ‘उग हो सूरज देव’, ‘Patna के घाट पर’, ‘सुनअ छठी माई’, ‘हो दीनानाथ’, ‘सांझ के दिहली अर्घिया’ – ऐसा कोई घाट नहीं जहां ये गीत न बजे हों.
परदेश में रह रहा बिहारी जब ये गीत सुनता है तो उसकी आंखें नम हो जाती हैं, उसे अपना गांव याद आ जाता है. और देखिए जीवन का आखिरी संयोग—जीवन भर छठी मैया के गीत गाने वाली शारदा सिन्हा ने छठ पर ही विदा ली. 5 नवंबर 2024, छठ महापर्व का पहला दिन नहाय-खाय. उसी रात 9 बजकर 20 मिनट पर दिल्ली के एम्स में 72 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली. वे 6 साल से मल्टीपल मायलोमा, एक तरह के ब्लड कैंसर से जूझ रही थीं. जाते-जाते भी 4 दिन पहले उन्होंने एम्स के बेड से अपना आखिरी छठ गीत ‘दुखवा मिटाई छठी मैया’ रिलीज करवाया और सभी व्रतियों को छठ की शुभकामनाएं दीं थीं.
लोकगीतों के अलावा हिंदी फिल्मों में भी उनकी आवाज अमर है. सलमान खान की पहली सुपरहिट फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ (1989) का गीत ‘कहे तोसे सजना तोहरी सजनिया’ और ‘हम आपके हैं कौन’ का ‘बाबुल जो तुमने ‘सिखाया’—दोनों में शारदा सिन्हा की ही आवाज है.
नई पीढ़ी ने उन्हें ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर-2’ के ‘तार बिजली से पतले हमारे पिया’ से पहचाना. उनके योगदान के लिए India Government ने उन्हें 1991 में पद्मश्री और 2018 में पद्म भूषण से सम्मानित किया. इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, बिहार रत्न, मिथिला विभूति जैसे सैकड़ों सम्मान मिले. बिहार की वह शरीर से गई हैं, लेकिन जब तक छठ है, जब तक घाट है, तब तक शारदा सिन्हा जिंदा रहेंगी.
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केके/एमएस