हैदराबाद : भाग्यलक्ष्मी मंदिर में अष्टमी पर मराठी ढोल-ताशा वादन सेवा ने खींचा लोगों का ध्यान

हैदराबाद, 18 अक्टूबर . हैदराबाद के पहले मराठी ढोल-ताशा ग्रुप मित्रांगण पथक ने अष्टमी के अवसर पर चारमीनार के पास स्थित भाग्यलक्ष्मी माता मंदिर में पारंपरिक ढोल-ताशा वादन सेवा अर्पित की.
इस दौरान देश की समृद्धि, किसानों के कल्याण और पूरी मानवता की शांति और सद्भाव के लिए प्रार्थना की गई. श्री भाग्यलक्ष्मी मंदिर एक छोटा हिंदू मंदिर है जो देवी लक्ष्मी को समर्पित है. यह ऐतिहासिक 16वीं सदी के चारमीनार की दक्षिण-पूर्वी मीनार के ठीक बगल में स्थित है.
पारंपरिक ढोल-ताशा वादन सेवा एक जीवंत और ऊर्जावान भक्ति अनुष्ठान है जो नवरात्रि समारोह के दौरान विशेष युवा टोलियों द्वारा किया जाता है. दुर्गाष्टमी यानी अष्टमी, जो शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन होती है, पर मंदिर में धार्मिक उत्साह और भी बढ़ जाता है.
अष्टमी की शाम को ढोल बजाने वाली टोलियां वादन सेवा करती हैं. इसमें पारंपरिक भारी ढोल और तेज आवाज वाले ताशे का उपयोग किया जाता है, जिससे एक तेज और ऊर्जावान आध्यात्मिक माहौल बनता है. नवरात्रि के दौरान मंदिर में भव्य महा आरती और हवन होते हैं लेकिन अष्टमी की शाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इस दिन पुराने शहर में भारी संख्या में भक्त आते हैं.
ढोल की लयबद्ध थाप मंदिर की सजावट के साथ और भी सुंदर लगती है. त्योहारों के दौरान मंदिर को फूलों और रोशनी से 30 से 50 फीट ऊंचाई तक सजाया जाता है. नवरात्रि की शाम की आरती के दौरान चारमीनार के आसपास का क्षेत्र बेहद भीड़भाड़ वाला हो जाता है. इसलिए वादन सेवा या महा आरती देखने के लिए जल्दी पहुंचने की सलाह दी जाती है.
मित्रांगण ढोल ताशा पथक हैदराबाद का पहला और सबसे लोकप्रिय पारंपरिक Maharashtraीयन ढोल-ताशा समूह है. इसकी स्थापना 11 साल पहले की गई थी.
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वीकेयू/पीएम


