हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन

कांगड़ा, 29 सितंबर . Himachal Pradesh की राजनीति के कद्दावर नेता और अपनी बेबाकी के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन हो गया है. उनके निधन की खबर आते ही कांगड़ा समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है.

मेजर मनकोटिया प्रदेश की राजनीति में एक स्पष्टवादी और बेबाक नेता के तौर पर जाने जाते थे. उन्होंने लंबे समय तक हिमाचल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और हमेशा जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाया. कांगड़ा क्षेत्र की समस्याओं को लेकर वह हमेशा आगे रहे और Government व प्रशासन के सामने मजबूती से अपनी बात रखते थे.

सैन्य पृष्ठभूमि से आने वाले मनकोटिया का अंदाज सबसे अलग था. वह बिना किसी लाग-लपेट के अपनी बात रखते थे, जिस वजह से उनकी एक अलग पहचान बनी हुई थी. कांगड़ा के विकास और लोगों के हितों के लिए उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ीं.

उनके निधन को कांगड़ा के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है. Political, सामाजिक और अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है.

मेजर मनकोटिया का जन्म कांगड़ा के त्यारा गांव में हुआ था. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई शिमला के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन स्कूल से की थी. पढ़ाई के बाद वह सेना में शामिल हुए और मेजर के पद तक पहुंचे. सेना से आने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा.

राजनीति में उन्होंने शाहपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और विधायक के तौर पर जनता की सेवा की. वह प्रदेश Government में पर्यटन मंत्री भी रहे. मंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई अहम फैसले लिए. मेजर मनकोटिया ने तीन किताबें भी लिखी हैं, जिनमें ‘द पैटर्न्स ऑफ डेस्टिनी’, ‘टर्मॉइल’ और ‘अपहीवल’ शामिल हैं. लेखन के जरिए भी उन्होंने न्याय और समानता से जुड़े अपने विचार सामने रखे थे.

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वीकेयू/पीएम

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