‘हर कोई इसका सपना देखता है, यह खास उपलब्धि,’ 100वां फर्स्ट क्लास मैच खेलकर खुश श्रेयस गोपाल

चेन्नई, 6 सितंबर . श्रेयस गोपाल के लिए 100 फर्स्ट-क्लास मैच खेलना एक सपना जैसा था, लेकिन दलीप ट्रॉफी के फाइनल में मैदान पर उतरकर यह मुकाम हासिल कर लिया. कर्नाटक के लेग-स्पिन ऑलराउंडर ने कहा कि वे एक और बड़े मिशन पर काम कर रहे हैं: यह साबित करना कि रेड-बॉल क्रिकेट में लेग-स्पिनर्स की भूमिका अभी भी अहम है.

गोपाल ने India के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के साथ मिलकर Sunday को एमए चिदंबरम स्टेडियम में साउथ जोन और ईस्ट जोन के बीच जारी दलीप ट्रॉफी फाइनल के दौरान 100 फर्स्ट-क्लास मैच खेलने का रिकॉर्ड बनाया.

गोपाल ने पहले दिन का खेल खत्म होने के बाद पत्रकारों से कहा, “हर कोई देश के लिए खेलने और 100 फर्स्ट-क्लास मैच खेलने का सपना देखता है. यह एक बहुत ही खास उपलब्धि है और मैं इस मौके के लिए बहुत आभारी हूं. मैं इसे लेकर बहुत खुश हूं.”

2024 में केरल के लिए खेलने के बाद गोपाल कर्नाटक लौटे, जिसके बाद उनके करियर में एक नई जान आई है. पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में, उन्होंने 48 विकेट लेकर तीसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज का स्थान हासिल किया और साथ ही बल्ले से 5 अर्धशतक भी लगाए.

उन्होंने कहा, “मैंने बहुत मेहनत की, खासकर गेंदबाजी पर. मुझे बताया गया था कि बहुत कम लेग-स्पिनर ऐसे हैं जिन्होंने 30-50 से ज्यादा मैच खेले हैं. मैं यह दिखाना चाहता था कि लेग-स्पिनर रेड-बॉल क्रिकेट खेल सकते हैं और सफल भी हो सकते हैं. मैंने अपनी गेंदबाजी पर बहुत मेहनत की. बल्लेबाजी मेरे लिए थोड़ी स्वाभाविक थी, क्योंकि मैं एक बल्लेबाज के तौर पर बड़ा हुआ था, इसलिए मुझमें बल्लेबाजी की स्वाभाविक क्षमता थी, लेकिन गेंदबाजी के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी. मैंने कई हफ्तों, महीनों और वर्षों तक गेंदबाजी की.”

गोपाल के अनुसार, हाल के सीजन में उनकी गेंदबाजी के नजरिए में आया मुख्य बदलाव पूरी तरह से तकनीकी न होकर रणनीतिक रहा है. उन्होंने कहा, “क्रीज का इस्तेमाल करना, स्थिति को समझना और यह जानना कि कब हमला करना है और कब बचाव करना है. ज्यादातर बार चीजें आपके हिसाब से होती हैं, लेकिन कभी-कभी, जैसे आज हुआ, ऐसा नहीं होता, लेकिन जब आप किसी प्लान के साथ मैदान पर उतरते हैं और किसी लक्ष्य को पाने की कोशिश करते हैं, तो कम से कम आपको एक दिशा मिलती है. अगर आप बिना किसी प्लान के जाते हैं, तो अक्सर आपको पता ही नहीं चलता कि आप पर क्या मुसीबत आने वाली है.”

घरेलू क्रिकेट खेलने का एक दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले गोपाल ने, जिन्होंने पहले दिन 19 ओवर में 77/0 के आंकड़े के साथ खेल खत्म किया, खेल के अनिश्चित स्वभाव के बीच भावनात्मक संतुलन बनाए रखने की अहमियत पर जोर देते हुए अपनी बात खत्म की.

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि तटस्थ रहना बहुत जरूरी है; सफलता मिलने पर बहुत ज्यादा उत्साहित न हों और आज जैसे दिनों में, बहुत ज्यादा बुरा भी न महसूस करें. एक बार किसी ने मुझसे कहा था कि असफलता की तुलना में सफलता को संभालना ज्यादा मुश्किल होता है. जब आप सफल होते हैं, तो आप आसानी से बहक सकते हैं. जब आपको सफलता नहीं मिलती, तो आप और बेहतर करना चाहते हैं, इसलिए आप और ज्यादा मेहनत करते हैं, लेकिन यह बहुत जरूरी है कि आप उतनी ही मेहनत करें, चाहे आप सफल हों या चीजें आपके पक्ष में न हों.”

आरएसजी

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