‘हम ऐसी स्थितियों के लिए तैयारी करते हैं’, 0-6 से पिछड़ने के बावजूद मनीषा पर नहीं था कोई मानसिक दबाव

New Delhi, 1 नवंबर . भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने बताया कि अपने कोचों के साथ मुश्किल मैचों की स्थितियों के लिए वर्षों तक की गई प्रैक्टिस ने उन्हें सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के फाइनल में 0-6 से पिछड़ने के बाद वापसी करने में मदद की. उन्होंने कजाकिस्तान के अस्ताना में महिलाओं के 59 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर ऐतिहासिक वापसी की.
सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं मनीषा ने कहा कि स्वर्ण पदक के मुकाबले में एबिगेल नेटो के खिलाफ 0-6 से पिछड़ने के बावजूद उन पर कोई मानसिक दबाव नहीं था, क्योंकि उन्होंने ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों के लिए पहले से ही लगातार ट्रेनिंग की थी.
मनीषा ने बताया कि ऐसी स्थितियों के लिए उनकी तैयारी, खासकर आखिरी कुछ सेकंड में अंक हासिल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें मैच का पासा पलटने और ऐतिहासिक जीत हासिल करने में मदद की. Sunday को साई मीडिया द्वारा आयोजित एक बातचीत में मनीषा ने कहा, “जब हम प्रैक्टिस करते हैं, तो हमारे कोच हमें ऐसी स्थितियां देते हैं जहां हमें 30 सेकंड के अंदर अंक हासिल करने होते हैं. हम इसी पर प्रैक्टिस करते हैं. मैं लंबे समय से इसके लिए काम कर रही थी. मुझे ऐसी स्थितियों को संभालना था, इसलिए मैंने प्रैक्टिस की और इससे मदद मिली. वहां कोई मानसिक दबाव नहीं था.”
23 वर्षीय मनीषा ने एशियन गेम्स में मिली निराशा के बारे में भी बात की, जहां वह महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग में कोई पदक नहीं जीत पाई थीं. हालांकि, उन्होंने बताया कि उन्होंने तुरंत अपना ध्यान वर्ल्ड चैंपियनशिप पर लगा दिया, जो ठीक 10 दिन बाद होने वाली थी. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगा था कि मैं एशियन गेम्स 2026 से बिना कोई पदक जीते वापस आऊंगी. मैंने जितनी कड़ी मेहनत की थी और जितनी प्रैक्टिस की थी, उससे मुझे पूरा यकीन था कि मैं पदक जीतूंगी. मैं बहुत निराश थी. ऐसा कैसे हो सकता है? लेकिन जो हो गया, मैं उस पर ध्यान नहीं देती. मैं आगे जो होने वाला है, उस पर विश्वास रखती हूं.”
उन्होंने आगे कहा, “मेरे पास 10 दिन थे, इसलिए मैंने अपना पूरा ध्यान वर्ल्ड चैंपियनशिप पर लगाया. इन 10 दिनों में मैंने अपनी कमियों पर काम किया. तो हां, इससे मुझे मदद मिली.” मनीषा ने अस्ताना में 59 किलोग्राम कैटेगरी में हिस्सा लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि दो प्रतियोगिताओं के बीच कम समय होने की वजह से 57 किलोग्राम कैटेगरी में दोबारा उतरने के लिए अपना वजन मैनेज करना और रिकवर करना मुश्किल होगा.
लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 को ध्यान में रखते हुए मनीषा ने बताया कि वह अगले साल होने वाले क्वालिफिकेशन इवेंट्स में 57 किलोग्राम कैटेगरी पर फोकस करेंगी, क्योंकि 59 किलोग्राम कैटेगरी ओलंपिक प्रोग्राम का हिस्सा नहीं है. उन्होंने कहा, “अगले साल होने वाले लॉस एंजिल्स क्वालिफायर्स के लिए मैं 57 किलोग्राम कैटेगरी में हिस्सा लेना चाहती हूं.”
उन्होंने 2027 में होने वाली चार रैंकिंग सीरीज प्रतियोगिताओं में भाग लेने के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि इससे उन्हें ओलंपिक क्वालिफिकेशन इवेंट्स की तैयारी में मदद मिलेगी. उन्होंने आगे कहा, “हमारे लिए सबसे जरूरी बात चार रैंकिंग सीरीज में खेलना है. अगर हम इनमें हिस्सा लेते हैं, तो हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा, जिससे लॉस एंजिल्स क्वालिफायर्स आसान हो जाएंगे.”
इस पहलवान ने ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (टॉप्स) से मिले सपोर्ट को भी स्वीकार किया, जिसमें वह 2024 से शामिल हैं. उन्होंने बताया कि आर्थिक मदद और इंटरनेशनल ट्रेनिंग कैंप्स में हिस्सा लेने के मौके ने उनके विकास में अहम भूमिका निभाई है. मनीषा ने कहा, “टॉप्स स्कीम के तहत हमें हर महीने पॉकेट मनी मिलती है. एक खिलाड़ी के लिए यह बहुत जरूरी है. कई चीजें काफी महंगी होती हैं, जिनका खर्च उठाना हमारे परिवार के लिए मुमकिन नहीं होता. उदाहरण के लिए जब हम विदेशी कैंप्स में जाते हैं, तो टॉप्स हमें वहां पहुंचने में मदद करता है. हमें विदेशी खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस करने का मौका मिलता है, जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम बहुत कुछ सीख पाते हैं.”
उन्होंने यह भी बताया कि एशियन गेम्स में खराब प्रदर्शन के बावजूद टॉप्स ने उनका साथ नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें अपना पूरा ध्यान लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर लगाने के लिए प्रोत्साहित किया. मनीषा ने कहा, “मैं 2024 से टॉप्स का हिस्सा हूं. टॉप्स ने मुझे बहुत कुछ दिया है और वह हमेशा मेरा सपोर्ट करते हैं. एशियन गेम्स में मेडल न जीत पाने के बाद भी, उन्होंने मुझे लॉस एंजिल्स पर फोकस करने के लिए कहा. टॉप्स मुझे मेरी जरूरत की हर चीज मुहैया कराता है. इसके लिए मैं टॉप्स का धन्यवाद करती हूं.”
एशियन गेम्स और विश्व चैंपियनशिप की तुलना करते हुए मनीषा ने कहा कि दोनों ही प्रतियोगिताओं में मजबूत प्रतिद्वंद्वी होते हैं, इसलिए यह तय करना मुश्किल है कि कौन सी ज्यादा कठिन है. उन्होंने कहा, “कुश्ती में एशिया बहुत मजबूत है. पूरी दुनिया भी मजबूत है. मैं तुलना कैसे कर सकती हूं? प्रतियोगिता तो प्रतियोगिता होती है. एशिया में भी बेहतरीन खिलाड़ी आते हैं और विश्व चैंपियनशिप में भी. मगर विश्व स्तर पर यूरोपीय खिलाड़ियों का पलड़ा थोड़ा भारी रहता है, जबकि एशिया में एशियाई देशों के खिलाड़ी होते हैं.” विश्व चैंपियनशिप में India ने कुल चार पदक जीते, जिनमें मनीषा का ऐतिहासिक स्वर्ण पदक भी शामिल था. इसके अलावा, India ने दो रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किए.
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एसएम/एबीएम


