
New Delhi, 5 सितंबर . social media इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट ने एक दिन की Police कस्टडी में भेज दिया है. आरोपी के वकील उमेश शर्मा ने Police की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद परिवार को सूचना तक नहीं दी गई. वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत और सांसद कुमारी सैलजा ने गिरफ्तारी में देरी को लेकर Government पर निशाना साधा और कहा कि सब कुछ सामने होने के बावजूद कार्रवाई में इतना वक्त क्यों लगा?
वकील उमेश शर्मा ने कहा, “दिल्ली Police ने अपने हिसाब से, अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए उन्हें कहीं और पेश कराया. सुनने में आया है कि एक दिन की Police कस्टडी दी गई है. हमारे देश का कानून ऐसा है कि आप जब भी किसी को गिरफ्तार करते हैं, तो 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के यहां पेश कराना पड़ता है. First Information Report में और भी धाराएं जोड़ी गई हैं. एक पॉक्सो, एससीएसटी के एक्ट जोड़े गए हैं. आईओ तय करेगा कि किस कोर्ट में उसे पेश कराए, क्योंकि सबकी कोर्ट अलग-अलग होती है.”
उन्होंने कहा कि हमें सूचना नहीं दी गई. डीके बसु के फैसले के बाद से Police के लिए जरूरी है कि आप जब किसी को गिरफ्तार करें, तो उसकी सूचना उनके करीबी को दें. एक दिन की कस्टडी के बाद आईओ तय करेंगे कि आगे कहां पेश किया जाए. प्रक्रिया के हिसाब से Sunday को जो ड्यूटी मजिस्ट्रेट बैठते हैं, वहां पेश कराना चाहिए. आईओ को उनके अधिकारियों ने कहा होगा कि यहां लेकर जाओ, वहां नहीं, तो हो सकता है कि वो ये तरीका अपनाएं.
वकील उमेश शर्मा ने कहा कि वकालतनामा पर हस्ताक्षर कराने के बाद हमारे पास अथॉरिटी आती है, तो कानूनी तौर पर हम तभी खड़े हो पाएंगे. क्रिमिनल केस में आमतौर पर यही होता है कि जब किसी अभियुक्त को पेश कराया जाता है, तो मजिस्ट्रेट के सामने वकालतनामा पर हस्ताक्षर कराया जाता है. मजिस्ट्रेट इस पर मुहर लगाते हैं कि ये मेरे द्वारा साइन किया गया है.
इस मामले पर कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा, “सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति किसी के सिर पर सिर्फ इसलिए मार सकता है क्योंकि वह उससे सहमत नहीं है? जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के विरोध प्रदर्शन के दौरान, सादे कपड़ों में जिन लोगों ने युवा प्रदर्शनकारियों पर हमला किया, उनमें यह व्यक्ति भी एक था और उसने किसी के सिर पर मारा.”
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कहा, “इतना समय कैसे लगा? जब सब कुछ सबके सामने था, तो इतना समय क्यों लगा? उनके काम बहुत ज्यादा सेलेक्टिव हैं. उनके सिस्टम में कोई इंसाफ नहीं है. कम से कम लोगों को दिखाने के लिए कुछ तो करो. आप यह भी नहीं दिखा पा रहे हैं कि आप निष्पक्ष रह सकते हैं या इंसाफ के साथ खड़े हो सकते हैं.”
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केके/एबीएम