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Monday, 2 November 2026
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सॉफ्ट टेनिस: जापान से हुई उत्पत्ति, हल्की रबर की गेंद का होता है इस्तेमाल, जानिए नियम और खेल का इतिहास

सॉफ्ट टेनिस: जापान से हुई उत्पत्ति, हल्की रबर की गेंद का होता है इस्तेमाल, जानिए नियम और खेल का इतिहास

New Delhi, 2 नवंबर . एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में देश के लिए पहला मेडल जीता. जय की इस सफलता के बाद से ही यह खेल चर्चा का विषय बन गया. सॉफ्ट टेनिस का गेम टेनिस से ही मिलता-जुलता है, लेकिन इसके नियमों और गेंद में अंतर देखने को मिलता है. आइए आपको बताते हैं सॉफ्ट टेनिस खेल की उत्पति कहां से हुई और कैसे हुआ इस गेम का विकास.

सॉफ्ट टेनिस जैसा की नाम से प्रतीत होता है कि यह खेल पारंपरिक टेनिस से ही उत्पन्न हुआ है. साल 1884 में इस खेल की उत्पति जापान में हुई. 19वीं शताब्दी के आखिर में एक पश्चिमी मिशनरी के माध्यम से टेनिस के खेल को जापान लेकर आया गया. इसके बाद जापान के लोगों ने इसे अपने अनुकूल बनाने के लिए पारंपरिक टेनिस के खेल में बदलाव किए और इसे सॉफ्ट टेनिस का नाम दिया गया. जापानी लोगों ने टेनिस में इस्तेमाल होने वाली कठोर गेंद की जगह एक नरम, हल्की हवा भरी रबर वाली गेंद और हल्के रैकेट का उपयोग करना शुरू किया.

साल 1955 में जापान, साउथ कोरिया और ताइवान ने मिलकर एशियई सॉफ्ट टेनिस महासंघ की स्थापना की. यह संघ इन तीनों देशों के बीच 1956 से 1973 के बीच हुई एशियाई चैंपियशिप के लिए जिम्मेदार रही. 1972 में संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई में सॉफ्ट टेनिस फेडरेशन की स्थापना की गई. जल्द ही सॉफ्ट टेनिस का खेल हवाई में लोकप्रिय बन गया और राज्य स्तरीय टूर्नामेंट का आयोजन किया जाने लगा. इसके बाद ब्राजील, वेनेजुएला और हांगकांग ने भी इस खेल को लेकर संगठन बनाया. 1973 में इंटरनेशनल सॉफ्ट टेनिस महासंघ की स्थापना की गई. 1975 में विश्व सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप का पहली बार आयोजन हवाई में किया गया. 1977 में दूसरी विश्व चैंपियनशिप और 1979 में तीसरी चैंपियनशिप का आयोजन साउथ कोरिया में हुआ.

पूर्वी यूरोप में सॉफ्ट टेनिस की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ती रही और यूरोपीय सॉफ्ट टेनिस महासंघ की स्थापना की गई. 1988 में यह खेल एशियाई ओलंपिक परिषद में शामिल हो गया. सॉफ्ट टेनिस को साल 1990 में प्रदर्शनी खेल के रूप में एशियन गेम्स में शामिल किया. इसके बाद 1994 में यह गेम आधिकारिक तौर पर एशियन गेम्स में एक स्पर्धा बना. इंटरनेशनल सॉफ्ट टेनिस महासंघ के अनुसार, इस खेल में अब लगभग 65 देश हिस्सा लेते हैं, जिसमें India का नाम भी शामिल है.

सॉफ्ट टेनिस के खेल में गेंद टेनिस के मुकाबले हल्की होती है. इसका वजन तकरीबन 31 ग्राम और व्यास लगभग 6.6 सेमी होता है. इसमें हवा से भरी हुई नरम रबर की खोखली गेंद का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं, रैकेट भी हल्का होता है. हालांकि, सॉफ्ट टेनिस के कोर्ट का आकार सामान्य टेनिस कोर्ट की तरफ ही होता है. नेट की ऊंचाई 1.07 मीटर होती है. इसमें एकल और युगल दोनों स्पर्धाओं में मैच खेले जाते हैं.

सॉफ्ट टेनिस में खिलाड़ियों को प्वाइंट्स 1, 2, 3,4 के क्रम में मिलते हैं. जो खिलाड़ी पहले 4 प्वाइंट हासिल करता है वो गेम को अपने नाम कर लेता है. दो खिलाड़ियों का स्कोर अगर बराबरी पर आ जाता है, तो उसे ‘ड्यूस’ कहा जाता है. इसके बाद गेम को जीतने के लिए खिलाड़ी या टीम को लगातार दो प्वाइंट की बढ़त बनाना जरूरी होता है. एकल मैच में जो खिलाड़ी 7 गेम में से पहले 4 गेम जीत लेता है वो मैच को अपने नाम कर लेता है.

वहीं, युगल मुकाबले में सर्वश्रेष्ठ 9 का गेम होता है. यानी जो टीम पहले 5 गेम जीत जाती है वो मैच को अपने नाम कर लेती है. यदि कोई मुकाबला 3-3 की बराबरी पर आ जाता है, तो फिर फाइनल गेम (टाई-ब्रेक) खेला जाता है. फाइनल गेम में सामान्य 4 प्वाइंट की जगह 7 प्वाइंट जीतने जरूरी होते हैं.

7 प्वाइंट हासिल करने वाला खिलाड़ी या टीम गेम और मैच दोनों को जीत लेती है. सॉफ्ट टेनिस में सर्विस का नियम भी थोड़ा अलग है. इसमें हर 2 प्वाइंट के बाद सर्विस बदलती है और इस बात के कोई फर्क नहीं पड़ता है कि प्वाइंट किसके पक्ष में गया है. डबल्स मैच में दोनों टीमें दो-दो प्वाइंट के लिए सर्विस करती हैं.

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एसएम/डीकेपी

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