सुनील शेट्टी ने बच्चों को रखा फिल्मी दुनिया से दूर, फिर कैसे अथिया ने चुना एक्टिंग का रास्ता

Mumbai , 4 नवंबर . Bollywood की चकाचौंध भरी दुनिया में कई सितारे ऐसे हैं, जिन्हें अभिनय विरासत में मिला लेकिन उस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए भी आसान नहीं रहा. जब घर का माहौल अनुशासन, सख्त कायदों और पारंपरिक मूल्यों से बंधा हो, तो मनोरंजन की दुनिया में कदम रखना एक चुनौती बन जाता है. कुछ ऐसी ही कहानी है, Actress अथिया शेट्टी की.
Bollywood के दिग्गज और ‘अन्ना’ के नाम से मशहूर सुनील शेट्टी के घर में बच्चों के मनोरंजन, खासकर फिल्मों और टीवी को लेकर सख्त नियम हुआ करते थे, जहां आज के समय युवा पीढ़ी के लिए स्क्रीन टाइम पर कोई पाबंदी नहीं होती है, तो वहीं अथिया शेट्टी के बचपन में मनोरंजन की हर गतिविधि पर एक कड़ा पहरा था.
5 नवंबर 1992 को Mumbai में जन्मी Actress अथिया शेट्टी के पिता सुनील शेट्टी Bollywood के बड़े स्टार हैं और मां माना शेट्टी एक फैशन डिजाइनर और समाज सेविका हैं. इसके बावजूद, उनकी मां ने उन्हें Bollywood की ग्लैमरस दुनिया और स्टार्स (जैसे जुहू या बांद्रा) से दूर दक्षिण Mumbai के अल्टमाउंट रोड वाले इलाके में पाला-पोसा ताकि बच्चे एक सामान्य जीवन जी सकें.
दरअसल, Actor सुनील शेट्टी के घर में सख्त नियम था कि बच्चे फिल्म के सेट पर नहीं जाएंगे और घर में कोई फिल्म मैगजीन भी नहीं आती थी. दरअसल, सुनील शेट्टी नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे फिल्म इंडस्ट्री की गॉसिप, अफवाहों या किसी भी तरह की नकारात्मक खबरों को पढ़कर बड़े हों. यही कारण है कि अथिया शेट्टी और उनके भाई अहान शेट्टी को अपने पिता की फिल्मों के सेट पर जाने की इजाजत नहीं थी. उन्हें एक सामान्य और साधारण माहौल में बड़ा किया गया ताकि वे लाइमलाइट के दबाव से बच सकें.
इसलिए बचपन से ही अथिया में समाज सेवा के संस्कार डाले गए. मात्र 10-12 साल की उम्र से ही वे अपनी मां और नानी की संस्था ‘सेव द चिल्ड्रन इंडिया’ में जाकर विशेष आवश्यकता वाले (स्पेशल नीड्स) बच्चों को पढ़ाने और उनकी मदद करने का काम करती थीं.
सुनील शेट्टी का मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री में आने वाले उतार-चढ़ाव, सफलता-विफलता और मीडिया ट्रायल का असर बच्चों के मानसिक विकास पर नहीं पड़ना चाहिए. वे उन्हें एक सुरक्षित और सामान्य बचपन देना चाहते थे.
सुनील शेट्टी ने एक पॉकास्ट के दौरान इस बात का खुलासा भी किया था कि उन्होंने अपने बच्चों को भारतीय बोर्ड के बजाय इंटरनेशनल/अमेरिकन बोर्ड के स्कूल में क्यों पढ़ाया था. सुनील का कहना था कि वे चाहते थे कि उनके बच्चे ऐसे स्कूलों में पढ़ें, जहां शिक्षक और स्टाफ अमेरिकी (विदेशी) हों, जिन्हें भारतीय सिनेमा के स्टार्स के बारे में ज्यादा जानकारी न हो. इससे बच्चों पर ‘सुनील शेट्टी की बेटी या बेटा’ होने का कोई मानसिक दबाव या विशेष पहचान का असर नहीं पड़े ताकि उनके बच्चे जमीन से जुड़े रहें और अपनी खुद की पहचान बनाएं.
दिलचस्प बात यह है कि इतनी पाबंदियों के बावजूद अथिया शेट्टी ने बड़े होकर अभिनय को ही अपने करियर के रूप में चुना. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अथिया ने आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका के अटलांटा में एक कॉलेज में दाखिला ले लिया था लेकिन एयरपोर्ट पर उनका मन बदल गया और उन्होंने अपने पिता से कहा कि वे फिल्मों की दुनिया में ही जाना चाहती हैं.
इसके बाद वे अकेले न्यूयॉर्क शहर चली गईं और वहां की प्रतिष्ठित न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी में दाखिला लिया. वहां से उन्होंने फिल्ममेकिंग और लिबरल आर्ट्स में स्नातक की डिग्री पूरी की. उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने साल 2015 में फिल्म ‘हीरो’ से Bollywood में कदम रखा.
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एनएस/पीएम


