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Wednesday, 4 November 2026
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त्रिपुरा: बीएसएफ जवानों पर हमले के फरार आरोपियों के बांग्लादेश भागने की आशंका, पुलिस ने किया अलर्ट

त्रिपुरा: बीएसएफ जवानों पर हमले के फरार आरोपियों के बांग्लादेश भागने की आशंका, Police ने किया अलर्ट

अगरतला, 4 नवंबर . त्रिपुरा Police ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा, ताकि बीएसएफ जवानों पर हुए हमले के मामले में फरार नौ आरोपी पड़ोसी देश बांग्लादेश भाग न सकें.

Police के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीएसएफ द्वारा दर्ज First Information Report में 19 हमलावरों के नाम शामिल हैं. इनमें से अब तक तीन महिलाओं समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

अधिकारी ने कहा कि Monday रात बीएसएफ कर्मियों पर हुए हमले के तुरंत बाद शुरू किया गया तलाशी अभियान अभी भी जारी है. बाकी नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. आशंका है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर बांग्लादेश में शरण ले सकते हैं. इसी कारण बीएसएफ को सीमा पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी अवैध आवाजाही को रोकने के लिए अलर्ट किया गया है.

बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर की महानिरीक्षक प्रिंसी रानी और सिपाहीजला जिले के Police अधीक्षक बिजॉय देबबर्मा ने Tuesday को अन्य अधिकारियों के साथ सिपाहीजला जिले के भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र स्थित आशाबाड़ी इलाके का दौरा किया.

अधिकारी के अनुसार, बीएसएफ आईजी ने जवानों को सीमा सुरक्षा संबंधी सभी मानक प्रक्रियाओं का अतिरिक्त सतर्कता के साथ पालन करने का निर्देश दिया. उन्होंने त्रिपुरा के Chief Minister माणिक साहा से भी मुलाकात कर उन्हें घटना की जानकारी दी.

Police के मुताबिक, बीएसएफ जवानों ने Monday को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ भारतीय और बांग्लादेशी तस्करों को कथित रूप से गांजा की तस्करी करते देखा. जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और एक भारतीय तस्कर को पकड़ लिया. हालांकि, बाड़ के दूसरी ओर मौजूद बांग्लादेशी तस्कर भाग निकले.

अधिकारी ने बताया कि एक अन्य भारतीय तस्कर भी भागने में सफल रहा और उसने गांव वालों को यह कहकर भड़काया कि बीएसएफ जवानों ने उसके साथ मारपीट की है.

इसके बाद करीब 50 पुरुष और महिलाएं मौके पर जमा हो गए. उन्होंने बीएसएफ के वाहन को घेर लिया और जवानों पर हमला कर दिया. इस हमले में कंपनी कमांडर समेत तीन बीएसएफकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में उन्हें इलाज के लिए Governmentी अस्पताल में भर्ती कराया गया.

हमलावरों पर एक बीएसएफ जवान से पंप एक्शन गन छीनने और बीएसएफ के वाहन को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है. घटना में एक हमलावर भी घायल हुआ. Wednesday को भी क्षेत्र में तनाव बना रहा. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीएसएफ, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स और Police ने संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च और क्षेत्र प्रभुत्व अभियान चलाया.

बीएसएफ ने एक बयान में कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा, तस्करी पर रोक और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए बल पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

बीएसएफ ने स्थानीय लोगों से शांति, कानून-व्यवस्था और सीमा क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग की अपील की. बल ने कहा कि ड्यूटी निभा रहे जवानों को डराने या उनके काम में बाधा डालने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा.

बयान में कहा गया कि हिंसा और धमकी की ऐसी घटनाएं बीएसएफ को अपने कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोक सकतीं. जवानों पर हमला होने के बावजूद उन्होंने संयम का परिचय दिया और घातक बल का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे मानव जीवन की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखाई देती है.

त्रिपुरा में इससे पहले भी सीमा पार तस्करों द्वारा बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बलों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. 16 अक्टूबर 2017 को तस्करों के वाहन ने बीएसएफ की 145वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार मंडल को कुचल दिया था. गंभीर रूप से घायल मंडल का 20 अक्टूबर 2017 को निधन हो गया था.

इसी तरह 21 नवंबर 2019 को त्रिपुरा Police के सब-इंस्पेक्टर दुर्गा कुमार ह्रांगखावल की भी ड्यूटी के दौरान कथित तस्करों द्वारा वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गई थी. इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि संगठित सीमा पार तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ता है.

त्रिपुरा की बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है. राज्य तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है, जिसके कारण यह अवैध घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है. सीमा के अधिकांश हिस्सों में बाड़ लगाई जा चुकी है, ताकि तस्करी, अवैध आवाजाही और अन्य सीमा पार अपराधों पर रोक लगाई जा सके.

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एएमटी/डीकेपी

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