
New Delhi, 21 सितंबर . उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले जातीय समीकरण और Political गठजोड़ को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश Government में मंत्री संजय निषाद ने ओम प्रकाश राजभर के उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने और पूर्वांचल राज्य बनने पर राजभर समाज के व्यक्ति को Chief Minister बनाए जाने संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया दी. इसके अलावा, उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान, अखिलेश यादव की प्रस्तावित रथ यात्रा, असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन संबंधी बयान और 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर निषाद पार्टी की तैयारियों पर भी अपनी बात रखी.
ओम प्रकाश राजभर ने हाल में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की बात कही थी और दावा किया था कि जातीय जनगणना के बाद इस दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है. उन्होंने पूर्वांचल बनने की स्थिति में राजभर समाज के Chief Minister की बात भी कही है. राजभर के बयान पर संजय निषाद ने कहा कि यदि Chief Minister का चयन केवल जातीय आबादी के आधार पर होना है तो निषाद समाज की आबादी राजभर समाज से कई गुना अधिक है. प्रदेश में निषाद समाज की आबादी करीब 18 प्रतिशत है और प्रदेश के लगभग हर उस क्षेत्र में निषाद समुदाय की मौजूदगी है, जहां नदियां और नाले हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस समय प्रदेश के सामने सबसे बड़ा मुद्दा विकास का है. उन्होंने Chief Minister योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और कानून-व्यवस्था बेहतर होने का दावा किया.
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को बांटने के बजाय बुंदेलखंड, पूर्वांचल, पश्चिमांचल और मध्य क्षेत्र समेत सभी इलाकों के विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए. यदि अलग-अलग हिस्सों को अलग राज्य बनाने के बाद वहां विकास की स्थिति बेहतर होने का कोई स्पष्ट अनुभव होता, तो इस विषय पर विचार किया जा सकता था. फिलहाल बिना किसी भेदभाव के पूरे उत्तर प्रदेश का विकास होना चाहिए. उन्होंने उत्तर प्रदेश को एक मॉडल प्रदेश बताते हुए Chief Minister योगी आदित्यनाथ को इसका श्रेय दिया.
निषाद ने कहा कि प्रदेश में क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में विकास की जरूरत है, लेकिन इसका समाधान राज्य का विभाजन करना नहीं है. बुंदेलखंड से लेकर पूर्वांचल, पश्चिमांचल और आगरा क्षेत्र तक विकास की योजनाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. उन्होंने Political दलों से अपील करते हुए कहा कि क्षेत्र और जाति के आधार पर विभाजन की राजनीति के बजाय विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
स्वामी प्रसाद मौर्य के एक बयान को लेकर Chief Minister योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी पर भी संजय निषाद ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि India की पहचान उसकी सभ्यता और परंपराओं से है. उन्होंने भगवान राम और निषादराज का संदर्भ देते हुए कहा कि यह वह भूमि है जहां मर्यादा को विशेष महत्व दिया जाता है. सार्वजनिक जीवन में रहने वाले सभी लोगों को मर्यादा का पालन करना चाहिए और समाज में अपनी जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए.
अखिलेश यादव की रथ यात्रा को लेकर भी संजय निषाद ने टिप्पणी की. निषाद ने कहा कि राजनीति में विचारधारा महत्वपूर्ण होती है और राजनेताओं को तटस्थ होकर काम करना चाहिए. उन्होंने सामाजिक और आर्थिक असमानता का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और सामाजिक न्याय की व्यवस्था दी है. समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा, सम्मान, सुरक्षा और विकास की मुख्यधारा में लाना जरूरी है. इसे अंबेडकरवादी और संवैधानिक विचारधारा से जोड़ते हुए कहा कि देश अब संविधान के आधार पर चलता है. उन्होंने पीडीए को लेकर बदलते Political बयानों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि रोज नए-नए तरीके से किसी सामाजिक समूह को जोड़ने या हटाने की बयानबाजी से कोई स्पष्ट Political विचारधारा सामने नहीं आती.
असदुद्दीन ओवैसी की ओर से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन की संभावना जताए जाने पर भी संजय निषाद ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ने कहा कि जिन Political दलों की स्थापना कांग्रेस की नीतियों के विरोध में हुई थी, अगर वे अब कांग्रेस की नीतियों के साथ खड़े होते हैं तो उन्हें अपने Political रुख को स्पष्ट करना चाहिए. सामाजिक और धार्मिक स्तर पर लोगों की भीड़ और Political संगठन में अंतर होता है.
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर संजय निषाद ने अपनी पार्टी की रणनीति भी बताई. उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है. पार्टी ने उत्तर प्रदेश को 10 प्रांतों में बांटकर संगठनात्मक तैयारी शुरू की है. प्रत्येक प्रांत में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, आईटी विंग और अन्य संगठनों के पदाधिकारी काम करेंगे. प्रत्येक क्षेत्र के लिए प्रभारी और सह-प्रभारी भी बनाए जाएंगे.
संजय निषाद के मुताबिक पार्टी का लक्ष्य हर विधानसभा क्षेत्र में निषाद समाज के मतदाताओं तक पहुंच बनाना है. उन्होंने कहा कि शहरी इलाकों में भी निषाद समुदाय की संख्या महत्वपूर्ण है, जबकि नदी और जलक्षेत्र वाले क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी और अधिक है. उन्होंने दावा किया कि करीब 150 से 160 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इसी आधार पर उन्होंने भाजपा से उन सीटों पर निषाद पार्टी को अधिक अवसर देने की मांग की, जहां पिछली बार भाजपा गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी.
निषाद ने कहा कि उनकी पार्टी भाजपा के साथ गठबंधन में रहते हुए ऐसी सीटों पर काम करना चाहती है, जहां पिछली बार गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कहा कि यदि ऐसी सीटें निषाद पार्टी को दी जाती हैं तो संगठन और सामाजिक समीकरण के आधार पर उन्हें जीत में बदलने का प्रयास किया जाएगा.
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पीएसके