
New Delhi, 5 अक्टूबर . Supreme Court ने Monday को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने से जुड़ी याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. याचिकाओं में सीईसी ज्ञानेश कुमार के काम करने के तरीके और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े उनके फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं. आरोपों को लेकर अदालत में केंद्र Government और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है.
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने Monday को याचिकाओं पर सुनवाई की. पीठ ने इस मामले को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक और याचिका के साथ जोड़ दिया.
अदालत में वकील विकास सिंह ने कहा कि 2023 एक्ट से चुनाव आयोग का अधिकार बढ़ाया गया है. कुछ अंतरिम उपायों की जरूरत है. आयोग की विश्वसनीयता इतनी कम हो गई है कि हर नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहा है. विकास सिंह ने सुनवाई पूरी होने तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की शक्तियों को सस्पेंड करने या उनसे शक्तियां वापस लेने की मांग की.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि नागरिकों के वोटिंग अधिकार खतरे में हैं और सीईसी पक्षपाती हैं.
मेनका गुरुस्वामी ने इसी से जुड़ी एक दूसरी याचिका में ‘फॉर्म 6’ में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए और एसआईआर प्रक्रिया में बड़ी खामियों का आरोप लगाया. मेनका गुरुस्वामी ने अदालत में कहा कि हमने इस देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते देखे हैं. आज वैसी स्थिति नहीं है. यह एक राष्ट्रीय समस्या है.
बेंच ने मेनका गुरुस्वामी से याचिका में की गई मांगों के बारे में सवाल किया, लेकिन उन्होंने कहा कि वह अपनी मांगों पर कायम हैं.
इसके बाद, Supreme Court ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया. साथ ही, Monday को सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर संधु और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी के अलावा केंद्र Government को नोटिस जारी किया.
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डीसीएच/