संगीत जगत की वो दिग्गज गायिका, जिन्हें कभी उनकी आवाज के कारण म्यूजिक क्लास से निकाल दिया गया था बाहर

New Delhi, 7 नवंबर . संगीत की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए लोग सालों तक रियाज करते हैं और संगीत की बारीकियां सीखते हैं. हालांकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी प्रतिभा उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाती है. ऐसी ही एक शख्सियत हैं भारतीय संगीत जगत की मशहूर गायिका उषा उत्थुप. अपनी भारी, गहरी और दमदार आवाज के लिए पहचानी जाने वाली उषा उत्थुप ने संगीत की दुनिया में वह मुकाम हासिल किया, जिसका सपना कई लोग देखते हैं. क्या आप जानते हैं कि जिस आवाज ने उन्हें देश-दुनिया में पहचान दिलाई, कभी उसी आवाज की वजह से उन्हें स्कूल की म्यूजिक क्लास से बाहर कर दिया गया था.
उषा उत्थुप का जन्म 8 नवंबर 1947 को Mumbai में एक तमिल परिवार में हुआ था. बचपन से ही उनके घर में संगीत का माहौल था. उनके माता-पिता को भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ पश्चिमी संगीत सुनने का भी काफी शौक था. घर में रेडियो पर अलग-अलग तरह के गाने बजते रहते थे. उषा भी बड़े ध्यान से उन्हें सुनती थीं और धीरे-धीरे संगीत के प्रति उनका लगाव बढ़ता चला गया.
उन्होंने Mumbai के बायकुला स्थित सेंट एग्नेस हाईस्कूल से पढ़ाई की. स्कूल के दिनों में उन्हें संगीत का बहुत शौक था लेकिन उनकी आवाज बाकी बच्चों से काफी अलग थी. उनकी आवाज भारी और गहरी थी, जिसकी वजह से उन्हें एक बार म्यूजिक क्लास से बाहर कर दिया गया. उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही आवाज एक दिन उनकी पहचान बन जाएगी. हालांकि, उनकी संगीत शिक्षिका ने उनको गाने के बजाय क्लैपर और ट्रायंगल जैसे म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाने का मौका दिया. भले ही उन्हें संगीत की औपचारिक शिक्षा नहीं मिली, लेकिन संगीत से उनका रिश्ता लगातार मजबूत होता गया.
उषा उत्थुप ने महज 9 साल की उम्र में पहली बार सार्वजनिक रूप से गाना गाया था. उनकी बहनों को भी संगीत में दिलचस्पी थी और वे इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती थीं. उन्हीं के जरिए उषा की मुलाकात मशहूर रेडियो उद्घोषक अमीन सयानी से हुई. अमीन सयानी ने उन्हें रेडियो सीलोन के ‘ओवलटीन म्यूजिक आवर’ में गाने का मौका दिया. यहां उन्होंने ‘मॉकिंगबर्ड हिल’ गाना गाया. इसके बाद किशोरावस्था में भी उन्हें कई जगह गाने के अवसर मिले.
उषा उत्थुप के करियर की शुरुआत साल 1969 में चेन्नई से हुई. उन्होंने वहां नाइन जेम्स नाम के एक छोटे से नाइट क्लब में गाना शुरू किया. उस समय उनका पहनावा भी काफी अलग था. उनकी पहली ही प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब पसंद किया. क्लब के मालिक उनकी गायकी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उषा को एक सप्ताह तक वहां गाने का प्रस्ताव दे दिया.
इसके बाद उनका सफर कोलकाता पहुंचा, जहां उन्होंने मशहूर नाइट क्लब में परफॉर्म किया. यहीं उनकी मुलाकात जानी चाको उत्थुप से हुई, जिनसे बाद में उन्होंने शादी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली और Mumbai में भी कई जगहों पर अपनी आवाज का जादू बिखेरा. धीरे-धीरे उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी और उन्हें बड़े मंचों पर गाने के मौके मिलने लगे.
उषा उत्थुप की दमदार आवाज ने जल्द ही फिल्मी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. साल 1970 में फिल्म ‘बॉम्बे टॉकी’ से उन्होंने Bollywood में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की. इसके बाद 1971 में फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के लिए भी उन्होंने गाना गाया. आगे चलकर उन्होंने आरडी बर्मन और बप्पी लाहिड़ी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम किया.
उनकी आवाज में एक अलग तरह की ऊर्जा और आकर्षण था. यही वजह थी कि वह पॉप, जैज, रॉक और भारतीय फिल्मी संगीत जैसे अलग-अलग अंदाज में आसानी से गा सकती थीं. ‘रंभा हो हो हो’, ‘मेहबूबा मेहबूबा’ और ‘डार्लिंग’ जैसे गानों से उनकी लोकप्रियता और बढ़ी.
उषा उत्थुप की लोकप्रियता सिर्फ India तक सीमित नहीं रही. उन्होंने विदेशों में भी कई शानदार प्रस्तुतियां दीं. केन्या में उनके गानों को काफी पसंद किया गया. वहां उन्होंने स्थानीय भाषा स्वाहिली में भी गाने गाए.
संगीत के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए India Government ने साल 2011 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया. इसके बाद साल 2024 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया. उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित कई दूसरे सम्मान भी हासिल किए हैं.
वह अपनी रंगीन साड़ियों, बड़ी बिंदी, पारंपरिक गहनों और शानदार स्टेज परफॉर्मेंस के लिए भी जानी जाती हैं.
–
पीआईएम/पीएम


